उज्जैन। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में माता सुदीक्षा जी ओर राजपिता रमित जी का ऐतिहासिक सत्संग संपन्न हुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से सेवाकार पहुंचे और सत्संग की अमृत वाणी मंत्रमुक्त होकर सुनी। सत्संग समागम के दौरान समस्त वातावरण प्रेम, शांति और एकता की दिव्य सुगंध से महक उठा।
जानकारी देते हुए उज्जैन से मीडिया सहायक विनोद गज्जर ने बताया कि देश से अनेक राज्यों से श्रद्धालु माता सुदीक्षा जी ओर राजपिता रमित जी की अमृत वाणी सुनने आए, जिसमें धार्मिक नगरी उज्जैन से भी भक्त पहुंचे। सतगुरु माता जी ने श्रद्धालुओं को भक्ति का ज्ञान देते हुए बताया कि भक्ति की कोई आयु सीमा नहीं होती। जैसे ही हमें निरंकार प्रभु का सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है, उसी क्षण से भक्ति की यात्रा का आरंभ हो जाता है। भक्तों के जीवन में भी अनेक उतार–चढ़ाव आते हैं, परंतु उनकी लगन और चेतना सदैव निरंकार प्रभु परमात्मा से जुड़ी रहती है। वे हर परिस्थिति को उसी की दात समझकर स्वीकार करते हैं और बिना किसी कठिनाई के, सरलता, सहजता एवं आनंद के साथ अपने जीवन को आगे बढ़ाते चले जाते हैं।
संत समागम से पूर्व 19 व 20 दिसंबर को ‘निरंकारी यूथ सिम्पोजियम’ का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा को जागृत कर उन्हें आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करना था। वही देशभर से आए युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जिसमें बताया कि ‘द सिक्स एलीमेंट्स (छः तत्व)’ – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश और चेतना पर आधारित स्किट, गीत, प्रस्तुतियाँ और पैनल डिसकशन के माध्यम से युवाओं को यह प्रेरणा दी गई कि आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन की व्यवहारिकता में कैसे उतारा जाए।
वही आगामी रविवार को माता सुदीक्षा जी के आव्हान पर उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्व विद्यालय में रोपे गए सैकड़ों पौधों का संरक्षण करने जाएंगे, जो अब वृक्ष बनने जा रहे हैं। जानकारी उज्जैन मीडिया सहायक विनोद गज्जर ने दी।
