नववर्ष के उपलक्ष पर निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने दिया खुशियों और आशीष भरा पावन संदेश

उज्जैन, निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने नववर्ष के उपलक्ष्य में सुख, समृद्धि और आनंदमय जीवन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नववर्ष का प्रथम दिवस हमें संतों के वचनों को सुनने और उन्हें जीवन में अपनाने का अनमोल अवसर देता है। जहाँ संसार वर्ष की शुरुआत मौज-मस्ती से करता है, वहीं संत – भक्त सत्य और सत्संग का मार्ग चुनते हैं। सत्संग से आरंभ हुआ जीवन हर पल निरंकार के एहसास को और अधिक दृढ़ करता चला जाता है।
मीडिया सहायक विनोद गज्जर जी ने बताया
निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि तार्किक रूप से नववर्ष केवल धरती का सूर्य के चारों ओर एक चक्कर और ऋतुओं का परिवर्तन है। हम शुभकामनाएँ देते हैं और नए संकल्प लेते हैं, पर वास्तविक परिवर्तन तभी सार्थक होता है जब वह भीतर से आए। संत – भक्त आत्ममंथन द्वारा सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और निरंकार प्रभु को सर्वोपरि मानते हुए सेवा, सुमिरन और सत्संग को जीवन की प्राथमिकता बनाते हैं।
सतगुरु माता जी ने निरंकार प्रभु की रजा में जीवन जीने को ही सच्ची साधना बताते हुए कहा कि एक भक्त की यही कामना होती है कि हर नया वर्ष उसे पहले से अधिक सेवा, सुमिरन और सत्संग से जोड़े, साथ ही वह अपनी सांसारिक जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा से निभाए। जब जीवन स्वयं संदेश बन जाए और कर्म शब्दों से अधिक बोलें, तभी सच्ची साधना का स्वरूप प्रकट होता है। इसी क्षण में, पूरी चेतन अवस्था के साथ, निरंकार के एहसास में जीना ही वास्तविक जीवन है, क्योंकि भूत और भविष्य माया का रूप हैं। जब मन में यह विश्वास दृढ़ हो जाए कि कल भी प्रभु की रज़ा थी और आज भी प्रभु की कृपा है, तो चिंता स्वतः समाप्त हो जाती है और जीवन सहज और संतुलित बन जाता है।
माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि नववर्ष केवल तारीख़ का परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रेम, मिठास, सौम्यता और समझ को अपनाने का अवसर है। मनमुटाव और द्वेष से दूर रहकर, दूसरों के भावों को समझते हुए, दोषों पर पर्दा डालकर गुणों को अपनाना ही सच्ची भक्ति है। हर श्वास में सुमिरन हो, हर क्षण में निरंकार का वास हो, यही नववर्ष का सच्चा अर्थ और संदेश है।
उज्जैन के मुखी त्रिलोके बेलानी जी ने नव वर्ष के अवसर पर सभी गुरुसिख भक्तो के लिए सुख, समृद्धि और आनंदमय जीवन की शुभकामनाए दी है!