केंद्रीय मंत्री और मुख्‍यमंत्री द्वारा ऊर्जा विभाग एवं स्‍वच्‍छ भारत मिशन की राज्‍य स्‍तरीय समीक्षा बैठक ली गई

उज्जैन, सिंहस्थ 2028 के लिए नगरीय विकास विभाग द्वारा स्वच्छता, पेयजल, भोजन व्यवस्था, सुरक्षा, परिवहन तथा स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाएँ। सिंहस्थ महापर्व राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व का आयोजन है, इसलिए सभी व्यवस्थाएँ उसी स्तर के अनुरूप सुनिश्चित की जाएँ। उक्त निर्देश केन्द्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रशासनिक संकुल भवन स्थित कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष मे ऊर्जा एवं स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक मे दिए ।
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा के दौरान ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए जा चुके जल के पुनर्प्रबंधन तथा शौचालय निर्माण कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। केन्द्रीय मंत्री श्री खट्टर ने कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश की सभी 16 स्मार्ट सिटीज़ में स्वच्छता के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु प्रभावी आईईसी (सूचना, शिक्षा एवं संचार) मॉडल विकसित कर डिजिटल माध्यमों से जन-जागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही व्यक्तिगत एवं सामुदायिक शौचालयों की आवश्यकता का सर्वे कर वास्तविक मांग के अनुसार स्वीकृति प्रस्ताव भेजने तथा सामुदायिक शौचालयों की स्वच्छता एवं रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा।
केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएं।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए केन्द्रीय मंत्री श्री खट्टर को कान्ह क्‍लोज डक्ट डायवर्जन परियोजना तथा सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना की प्रगति से अवगत कराया।

विद्युत वितरण एवं परिचालन क्षेत्र की समीक्षा के दौरान केन्द्रीय मंत्री श्री खट्टर ने रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के अंतर्गत शासकीय देयकों एवं सब्सिडी भुगतान को संबंधित वित्तीय वर्ष में ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक के प्रारंभ में कहा कि यह हम सबका सौभाग्‍य है कि केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर की अध्‍यक्षता में उज्‍जैन में सिंहस्‍थ और नगरीय विकास से संबंधित कार्यों की राज्‍य स्‍तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल के सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूर्ण हूए है। विकास के कार्य तेज गती से किए जा रहे है। मध्‍यप्रदेश भी कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर का पुष्‍प गुच्‍छ भेंट कर स्‍वागत किया गया।
बैठक में सर्वप्रथम आगामी सिंहस्‍थ महापर्व 2028 के अंतर्गत प्रक्रियाधीन विकास कार्यों की प्रगती और तैयारियों की समीक्षा की गई। कलेक्‍टर श्री रौशन कुमार सिंह ने पॉवर पॉईंट प्रेजेन्‍टेशन के माध्‍यम से सिंहस्‍थ 2028 के अंतर्गत प्रगतिरत योजनाओं और विकासकार्यों के बारे में जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि इस बार के सिंहस्‍थ में लगभग 40 करोंड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। सिंहस्‍थ के अंतर्गत उज्‍जैन के अलावा अन्‍य जिलों में 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि के विभिन्‍न प्रकार के कार्य किए जा रहे है। इन कार्यों में सड़के, सेतु, नवीन घाट निर्माण और शहर के बुनियादी ढ़ाचें के विकास से संबंधित कई महत्‍वपूर्ण योजनाएं सम्मिलित है। इसके अलावा उज्‍जैन में सिंहस्‍थ के दौरान शिप्रा नदी के जल से स्‍नान हो सके इसके लिए सेवरखेडी-सिलारखेडी परियोजना पर कार्य किया जा रहा है।
इसके अलावा 919 करोड़ की लागत से कान्‍ह-क्‍लोज डक्‍ट डायवर्सन परियोजना पर कार्य किया जा रहा है ताकि शिप्रा नदी में दूषित जल न मिल सकें। इसके अलावा 778 करोड़ रुपए की लागत से 29 कि.मी. से अधिक नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है और 120 करोंड रुपए की लागत से मौजुदा स्‍थाई घाटों का उन्‍नयन कार्य भी किया जा रहा है। जिससे 04 करोड़ से अधिक श्रद्धालु 24 घंटे में स्‍नान कर सकेंगे। उज्‍जैन की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 1692 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन – इंदौर 06 लेन मार्ग, 2,935 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन – इंदौर ग्रीनफिल्‍ड मार्ग, 5,017 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन-जावरा 04 लेन मार्ग, 2,523 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन – झालावाड 04 लेन मार्ग, 351 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन – मक्सी 04 लेन मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा शहर की आंतरिक सड़कों का निर्माण एवं चौडीकरण कार्य भी किया जा रहा है।
सिंहस्‍थ के अंतर्गत 22 से अधिक नए पुल, 05 रेल्‍वे ओवर ब्रिज, 17 नदी पुल का निर्माण भी किया जा रहा है। सिंहस्‍थ के दौरान रियल टाईम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए केंद्रीयकृत डि‍जिटल कमांड प्‍लेटफार्म बनाया जाएगा। 3 हजार हेक्‍टेयर से अधिक क्षेत्रफल में कुल 30 पार्किंग सेंक्‍टर बनाए जाएंगे। एसीएस डॉ. राजेश राजैारा ने जानकारी दी कि पार्किंग और होल्डिंग एरिया के लिए आस-पास के जिलों में भी व्‍यवस्‍था की जाएगी।
उज्‍जैन शहर जल आवर्धन योजना के अंतर्गत 1,133 करोंड रुपए की लागत से 200 एमएलडी जल शोधन संयंत्र, 700 से अधिक कि.मी. का पाईपलाईन नेटवर्क, 17 नए ओवरहेड टेंक, 49,087 नए पेय जल कनेक्‍शन किए जाएंगे।
कलेक्‍टर श्री रौशन कुमार सिंह ने बताया कि इस बार का सिंहस्‍थ जीरो वेस्‍ट सिंहस्‍थ होगा। सिंहस्‍थ को हरित सिंहस्‍थ बनाने के लिए 20 मेगावॉट की सोलर संयंत्र क्षमता प्रस्‍‍तावित है जिससे 3.2 करोड़ युनिट का अनुमानित वार्षिक विद्युत उत्‍पादन किया जाएगा। ऊर्जा परियोजनाओं एवं विकास कार्यों के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही अधोसंरचना उन्‍नयन एवं सुदृणिकरण के लिए उज्‍जैन में निर्माणाधीन 550 बेड़ के सर्वसुविधा युक्‍त मेडिकल कॉलेज भवन और संबंधित हॉस्‍टल सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि 46 करोड़ रुपए की लागत से आईटी पार्क का निर्माण भी तेज गति‍ से किया जा रहा है। उज्‍जैन विकास प्राधिकरण के द्वारा 3.2 हेक्‍टेयर क्षेत्र में 282 करोड़ रुपए की लागत से एकता मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसमें देश के सभी राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शोरुम और ‘’एक जिला, एक उत्‍पाद ‘’योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की दुकाने लगाई जाएंगी।
सिंहस्‍थ में स्‍वच्‍छता बेहद आवश्‍यक है इस पर विशेष ध्‍यान दिया जाए। शुद्ध पेयजल मिले, अपशिष्‍ट प्रबंधन भी अच्‍छे तरिके से किया जाए। सिंहस्‍थ के दौरान कुछ विशेष व्‍यवस्‍थाओं के लिए उज्‍जैन के आस-पास के अन्‍य जिले और अन्‍य प्रदेशों से भी सहयोग प्राप्‍त किया जाए।
केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर ने कहा कि स्‍वच्‍छ भारत मिशन भारत सरकार का एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण विषय है। नागरि‍कों में स्‍वच्‍छता के प्रति अधिक से अधिक जागरुकता लाई जाए। जिस प्रकार भोजन और पानी जरुरी है उस प्रकार सभी के जीवन में स्‍वच्‍छता भी उतनी ही जरुरी है।

*राज्य सरकार ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास को प्राथमिकता दे रही है*
बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर और मुख्‍यमंत्री डा यादव द्वारा प्रदेश में ऊर्जा और रिवेम्‍प्‍ड डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सेक्‍टर स्किम की समीक्षा भी की गई। बैठक में एसीएस श्री नीरज मंडलोई ने पॉवर पाईंट प्रेजेन्‍टेशन के माध्‍यम से बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत प्रदेश में विद्युत वितरण प्रणाली का सुदृणिकरण किया गया है। वर्ष 2020-21 में राज्‍य स्‍तर पर एटीएंडसी हानियां 41.55 प्रतिशत थी जो वर्ष 2025-26 में घट कर 25.68 प्रतिशत रह गई है।
इसी प्रकार एसीएस-एआरआर अंतर 1.23 रुपए प्रति यूनिट से घटकर मात्र 0.10 रूपए प्रति यूनिट रह गया है। स्‍मार्ट मि‍टरिंग के क्षेत्र में भी राज्‍य ने सराहनीय कार्य किया है। कुल लक्ष्‍य 134 लाख मीटरों के विरुद्ध 68 लाख मीटरों के अर्वाड जारी किए गए है। उपभोक्‍ताओं को इससे सीधा लाभ मिल रहा है। नेट मि‍टरिंग सुविधा भी पूरी तरह से स्‍मार्ट मिटरों में समाहित कर ली गई है । ऊर्जा विभाग द्वारा आरडीएसएस योजना के माध्‍यम से ना केवल हानियों में कमी एवं राजस्‍व सुधार किया जा रहा है बल्कि उपभोक्‍ताओं को सटीक बीलिंग और बेहतर सेवा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे है।
बैठक में जानकारी दी गई कि आगामी सिंहस्‍थ 2028 के दौरान सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन शहर एवं मेला क्षेत्र की अनुमानित विद्युत मांग 490 मेगावाट (शहरी क्षेत्र 260 मेगावाट + मेला क्षेत्र 230 मेगावाट) आंकी गई है। मेला क्षेत्र में साधु-संत शिविरों, स्ट्रीट लाइट, सजावटी रोशनी, फव्वारे, जल प्रदाय, कचरा प्रबंधन एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए विस्तृत भार आकलन किया गया है।
इसके अनुरूप उज्जैन में त्रिवेणी विहार, हासामपुरा, वाल्मीकि धाम, दुधतलाई, चारधाम, नानाखेड़ा सहित कई नए 33/11 केवी एवं 132/33 केवी उपकेंद्रों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। कुल मिलाकर सिंहस्थ-2028 से संबंधित कार्यों के लिए विभिन्न योजनाओं (आरडीएसएस, विभागीय मद, एसएसटीडी आदि) के अंतर्गत लगभग 994 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मेला क्षेत्र में अस्थायी विद्युत व्यवस्था के लिए अतिरिक्त कार्य भी प्रस्तावित हैं।
बैठक में मंत्री श्री खट्टर ने निर्देश दिए कि पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक कनेक्‍शन किए जाए। लोगों को इसके लिए प्रोत्‍साहित किया जाए। कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को लाभांवित किया जाए ताकि अन्‍न दाता ऊर्जा दाता भी बन सके। सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया जाए। इसके अंतर्गत संयंत्र स्‍थापित किए जाए।
केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दौरान लगभग 230 मेगावाट विद्युत ऊर्जा की खपत होने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए नवीन विद्युत अधोसंरचना के विकास हेतु व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व की केन्द्र सरकार के सहयोग से सिंहस्थ-2028 के लिए स्मार्ट विद्युत वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण हेतु 387 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्तमान में प्रदेश की कुल विद्युत क्षमता में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी निरंतर बढ़ रही है तथा इसकी क्षमता में और वृद्धि किए जाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पवन ऊर्जा (विंड एनर्जी) उत्पादन क्षमता के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। राज्य सरकार ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास को प्राथमिकता दे रही है।
बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर की उपस्थिति में आईआईएम इंदौर, शहरी विकास और आईआईएम नागपुर के मध्‍य एमओयु भी साईन किया गया। केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर के द्वारा जल संसाधन विभाग के अंतर्गत घाट निर्माण से संबंधित कार्यों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया।
बैठक में मध्‍यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, , ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर, नगरीय विकास एवं आवास राज्‍य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सांसद श्री अनिल फिरोजीया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेडा, महापौर श्री मुकेश टटवाल, अपर मुख्‍य सचिव श्री संजय दुबे, आयुक्‍त नगरीय विकास श्री संकेत भोंडवे, संभागायुक्‍त श्री आशीष‍ सिंह, एडीजी श्री राकेश गुप्‍ता, डीआईजी श्री नवनीत भसीन, कलेक्‍टर श्री रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्र‍दीप शर्मा, नगर निगम आयुक्‍त श्री अभिलाष मिश्रा एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थें।