भस्मलिंगार्चन समारोह, भगवान श्री महाकाल के आशीर्वाद से विश्वशांति और मानव कल्याण होगा- परमपूज्य गुरुमाऊली अण्णासाहेब मोरे

उज्जैन, ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान भगवान श्री महाकाल काल के भी काल हैं। उनके चरणों में आज लाखों सेवकों द्वारा समर्पित की गई भस्म लिंगार्चन सेवा के कारण आने वाले समय में निश्चित ही विश्वशांति स्थापित होगी और समस्त मानव जाति का कल्याण होगा। ऐसे विचार अखिल भारतीय श्री स्वामी समर्थ सेवामार्ग के पीठाधीश परमपूज्य गुरुमाऊली श्री अण्णासाहेब मोरे ने व्यक्त किए। यह सुनते ही उपस्थित हजारों सेवकों ने एक स्वर में जय महाकाल का जयघोष किया, जिससे संपूर्ण कार्यक्रम स्थल गूंज उठा।
काल पर अधिराज्य रखने वाले, अकाल मृत्यु एवं भय का निवारण करने वाले, दक्षिणाभिमुख एकमात्र ज्योतिर्लिंग—श्री महाकालेश्वर की उज्जैन नगरी, परमपूज्य गुरुमाऊली के आगमन तथा स्वामी सेवकों के अपार उत्साह और सेवाभाव से गुंज उठी। हिंदू धर्म परंपरा में अवंतिका (उज्जैन) नगरी को मोक्षपुरी, ज्योतिर्लिंग क्षेत्र तथा महाकुंभ पर्वस्थल के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।
यह भस्मलिंगार्चन समारोह सभी के लिए अत्यंत पुण्यदायी है। सामूहिक उपासना के माध्यम से सेवकों को आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाने की शक्ति प्राप्त होगी—ऐसा आशीर्वाद गुरुमाऊली ने दिया।
समस्त सेवक परिवार का विश्वशांति एवं मानव कल्याण हेतु सामूहिक आध्यात्मिक संकल्प
श्री स्वामी समर्थ गुरुपीठ के उपव्यवस्थापक, गुरुपुत्र नितीनभाऊ मोरे के मार्गदर्शन में सेवामार्ग की ओर से श्रीक्षेत्र उज्जैन में ऐतिहासिक, अतिउच्च भस्मलिंगार्चन समारोह अभूतपूर्व प्रतिसाद और अद्वितीय उत्साह के साथ अत्यंत भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।
विश्वशांति एवं मानव कल्याण के लिए समस्त सेवेकरियों के सामूहिक आध्यात्मिक संकल्प के साथ भस्मलिंगार्चन समारोह का शुभारंभ हुआ। सेवकरियों ने अत्यंत श्रद्धा-निष्ठा और पूर्ण अनुशासन के साथ यह अतिउच्च सेवा भगवान श्री महाकाल के चरणों में अर्पित की। इसके पश्चात गुरुमाऊली श्री मोरे का अमृततुल्य, प्रसादिक हितगुज (उपदेश) हुआ। इस अवसर पर गुरुमाता सौ. मंदाताई मोरे, गुरुपुत्र नितीनभाऊ मोरे सहित अन्य मान्यवर मंच पर उपस्थित थे।
गुरुमाऊली श्री मोरे ने महा ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान प्रभु श्री महाकाल के भस्म लिंगार्चन समारोह का महत्व स्पष्ट किया। आज की इस अतिउच्च सेवा में सहभागी हुए सभी सेवक भाग्यशाली और पुण्यवान हैं। समस्त मानव जाति के सर्वांगीण कल्याण हेतु, आने वाले संकटों पर विजय पाने के लिए तथा विश्व शांति की स्थापना के उद्देश्य से यह सेवा आयोजित की गई। इसका उद्देश्य राष्ट्र, समाज और धर्महित के साथ-साथ समस्त जीवसृष्टि का कल्याण हो तथा पूरे विश्व में शांति स्थापित हो। साथ ही मानव-निर्मित एवं प्रकृति-निर्मित संकटों से जीवसृष्टि की रक्षा हो और राष्ट्र की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो—इसी उदात्त भावना से यह सेवा संपन्न की गई।
इस सेवा में देशभर से तथा विदेशों से भी बड़ी संख्या में सेवेकरियों ने सहभाग लिया। इस सेवा से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग समाज कल्याण, सेवा मार्ग का ग्राम- नागरी अभियान तथा स्वामी कार्य के लिए करें और इस माध्यम से समस्त जगत को स्वामिमय करें—ऐसी आज्ञा गुरुमाऊली श्री मोरे ने दी। अपने हितगुज (उपदेश) में उन्होंने ग्राम-नागरी अभियान के 18 विभागों के महत्व को पुन: रेखांकित किया। आने वाला समय कठिन हो सकता है, फिर भी ग्राम-नागरी अभियान के माध्यम से घर-घर तक स्वामी कार्य पहुँचाने का उन्होंने आवाहन किया। उन्होंने गर्भसंस्कार, शिशु संस्कार, बाल संस्कार, युवा प्रबोधन, विवाह संस्कार, कृषि तथा आयुर्वेद जैसे विभागों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया।
उज्जैन के इतिहास में हुआ पहली बार ऐतिहासिक भस्म लिंगार्चन समारोह

भगवान श्री महाकाल उज्जैन में ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रतिष्ठित हैं। यह नगरी सप्त मोक्ष पुरियों में से एक है। इसी नगरी में आदिशक्ति भगवती का शक्तिपीठ भी स्थित है। साथ ही महाकुंभ पर्व के कारण यह अवंतिका अर्थात् उज्जैन नगरी अनादि काल से पावन मानी जाती रही है। ऐसी पवित्र नगरी में पहली बार भस्म लिंगार्चन जैसा अतिउच्च ऐतिहासिक समारोह आयोजित हुआ।
सुव्यवस्थित योजना, एक साथ लाखों सेवकों द्वारा बैठकर की गई सामूहिक सेवा, देश-विदेश से आए सेवकों के चेहरों पर झलकता अपार उत्साह, तथा उज्जैन के साधु-संतों के आशीर्वाद—इन सभी कारणों से सेवामार्ग का यह समारोह विशिष्ट, अनोखा और भूतपूर्व व भविष्य में दुर्लभ ऐसा अविस्मरणीय बन गया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सैकड़ों स्वयंस्फूर्त सेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मंगल पूजन विधि को उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला
व्यक्तिगत उन्नति के लिए उज्जैन में कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर मंगल पूजन का विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सेवकों ने सहभाग किया। वेद विज्ञान अनुसंधान विभाग के शास्त्री तथा उनकी संपूर्ण टीम के मार्गदर्शन में विधिवत पौरोहित्य संपन्न हुआ।
क्षणचित्रे –
-नंदी मंडप में ठीक दोपहर 4 बजे सेवकों द्वारा मंगल ग्रह अनुष्ठान पूजन का शुभारंभ किया गया।
-भस्मलिंगार्चन लाखों सेवेकरियों की उपस्थिति में आयोजित हुआ।
-याज्ञिकी सेवकों ने अनुष्ठान की पूजन विधि की जानकारी उपस्थित जनों को दी।
-शंख और डमरू जैसे भगवान महाकाल के वाद्यों के जयघोष के साथ, स्थानीय उज्जैन के वादकों द्वारा किए गए घोष से वातावरण में अद्भुत चैतन्य भर गया।
-प्रधान मंडल का पूजन नितीनभाऊ तथा सौ. वहिनीसाहेब के शुभहस्तों से संपन्न हुआ।
-मंगल मंत्रों के अनुष्ठान का नवकुंडात्मक हवन संपन्न हुआ।

प्रमुख उपस्थिति-
ज्ञानेश्वर पाटील, सांसद खंडवा
चंद्रकांत भाऊ पाटील, आमदार मुक्ताई नगर
भवरसिंह चौधरी, भाजपा सेक्रेटरी मध्य प्रदेश
माणिकराव गुरसळ, सचिव मंत्रालय
दिलीप स्वामी, कलेक्टर छ संभाजी नगर
राहुल चौधरी, मध्य प्रदेश
संजय खंबायते, जिलाध्यक्ष, भाजपा, छ. संभाजी नगर
जानकारी पुष्कर सोनवानी ने दी।