ग्रामीण रोजगार को सतत विकास का साधन बनाता वीबी-जीरामजी अधिनियम – श्री गौतम टेटवाल

उज्जैन, जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेतवाल ने संभागीय भाजपा कार्यालय लोकशक्ति भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए बताया की वृद्धिशील सुधार की बजाय संरचनात्मक बदलाव की जरूरत को समझते हुए एनडीए सरकार ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम (VB – G RAM 2025) बनाया और इसे कानून बनाया, यह अधिनियम मनरेगा की जगह लेता है और ग्रामीण रोजगार को सतत विकास का साधन बनाता है, जो विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप है!

भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में सांसद अनिल फिरोजिया, ग्रामीण जिलाध्यक्ष श्री राजेश धाकड़ , विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय, निगम सभापति कलावती यादव, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी सचिन सक्सेना, मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा, सह मीडिया प्रभारी राकेश पंड्या, जगदीश पांचाल, कमल बैरवा उपस्थित थे।
प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल ने पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों ने भारत की सामाजिक आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ये केवल कमजोर परिवारों को आय की सुरक्षा नहीं देते बल्कि परिसम्पति निर्माण के साथ ग्राम विकास और सामाजिक स्थिरता के साधन भी है, चुंकि बड़ी संख्या में लोग कृषि और उससे जुड़े कामों पर निर्भर है, इसीलिए मौसमी बेरोजगारी और आय में उतार चढ़ाव लगातार चुनौती बने रहते है।

श्री टेंटवाल ने कहा वर्ष 2006 में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (मनरेगा) ने इन समस्याओ को हल करने और मजदूरी रोजगार की गारंटी देने का प्रयास किया। कार्यक्रम शुरूआती वर्षों में तेजी से फैला और कई परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की, लेकिन कमजोर प्रशासन, भ्रष्टाचार और विकास उन्मुख दृष्टिकोण की कमी के कारण इसका दीर्घकालिक प्रभाव कमजोर रह गया।

श्री टेटवाल ने कहा राम राज्य की स्थापना के लिए और महात्मा गांधी जी की भावना के अनुरूप है और VB – G RAM G बिल लाया गया है।आखिर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को विकसित भारत और भगवान् राम के नाम से इतनी नफरत क्यों है? कांग्रेस कितनी भी साजिश रच ले, देश 2047 तक ’विकसित भारत’ बन कर रहेगा।

उन्होंने बताया नई योजना में काम के दिन ज्यादा होंगे तो साथ ही मजदूरों को पारिश्रमिक भी जल्दी मिलेगा। हर ग्रामीण परिवार को हर साल 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी। वन क्षेत्र में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग के कामगारों को 25 दिन का रोजगार और अधिक मिलेगा। मनरेगा पर सबसे अधिक खर्च मोदी सरकार ने किया है। मनरेगा पर अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए जिसमें मोदी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

*ग्रामीण योजना का नाम्म पहले भी महात्मा गाँधी के नाम पर नहीं था*

श्री टेटवाल ने कहा रोजगार योजना का नाम पहले से महात्मा गाँधी जी के नाम पर नहीं था। 1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिला कर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम योजना का नाम दिया जिसे राजीव गाँधी ने जवाहर रोजगार योजना का नाम दे दिया। सोनिया-मनमोहन की सरकार ने 2004 में इसे नरेगा कर दिया गया जिसे फिर 2005 में मनरेगा किया गया। कांग्रेस की सरकार ने जब जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान नहीं था?

उन्होंने कहा इसी तरह, आवास योजना का नाम पहले ग्रामीण आवास योजना था, राजीव गांधी ने 1985 में इसका नाम बदल कर इंदिरा आवास योजना कर दिया था। अप्रैल 2005 में कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना कर दिया। हर योजना में इन्होंने गाँधी नेहरू (एक परिवार) के नाम जबरन डाले। मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है।

*2005 की योजना से बेहतर है 2025 की योजना*

श्री टेटवाल ने बताया 2005 में मनरेगा शुरू हुई लेकिन अब ग्रामीण भारत बदल गया है। 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 4.86 प्रतिशत रह गई। साथ ही, कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है और आजीविका में विविधता आई है। पुराना ओपन-एंडेड मॉडल अब आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता। 2005 में हमारी ज़रूरतें अलग थीं, अब हमारी ज़रूरतें अलग हैं इसलिए इस ग्रामीण रोजगार योजना को 2025 की आवश्यकताओं के साथ पुनः व्यवस्थित करना आवश्यक था।

कांग्रेस की सरकार में मनरेगा में कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं थी, अब इसमें रियल टाइम डेटा अपलोड होगा। जीपीएस और मोबाइल मॉनिटरिंग होगी और एआई के द्वारा फ्रॉड डिटेक्शन होगा। इससे सही लाभार्थियों को काम मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

*नए क़ानून का फोकस 4 प्राथमिकताओं पर है.*

श्री टेटवाल ने बताया नये कानून में चार प्राथमिकताओ पर फोकस किया गया है जिसमे जल संबंधी कार्य, कोर-ग्रामीण बुनियादी ढांचा का निर्माण, आजीविका संबंधी बुनियादी ढाँचा का निर्माण और खराब मौसम के कारण काम में कमी को कम करना है। इससे जल सुरक्षा से खेती को बढ़ावा मिलेगा, सड़कें और कनेक्टिविटी से बाज़ार में सुधार होगा, भंडारण और आजीविका संपत्तियां ग्रामीण आय में वृद्धि लाएगी और जलवायु-अनुकूल कार्य गांवों को सशक्त बनायेंगे।

उन्होंने बताया VB – G RAM G बिल में प्रावधान किया गया है कि बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन काम बंद कर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बुआई और कटाई के समय मजदूरों की कमी नहीं होने देना है। मनरेगा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। नए बिल में मनरेगा के उलट हर हफ्ते पेमेंट किया जा सकता है। मनरेगा में 15 दिन में मजदूरी का भुगतान होता था।

*कांग्रेस की सरकारों में नामकरण*

श्री टेटवाल ने बताया कांग्रेस सरकारों देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं, पुरस्कारों के नाम गाँधी परिवार के नाम पर रखे। देश के खेल रत्न अवार्ड को भी राजीव गाँधी के नाम पर रखा गया जबकि खेल में राजीव गाँधी जी का कोई योगदान नहीं था। कांग्रेस पार्टी नेहरू-गांधी खानदान के सदस्यों के जन्मतिथि को राष्ट्रीय पर्व बना दिया और पुण्यतिथि को राष्ट्रीय शोक का दिन। कांग्रेस की सरकारों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी, सरदार वल्लभ भाई पटेल जी, लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे कई नेताओं के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किया गया।

*प्रधानमंत्री जी ने योजना के नाम को सेवा से जोड़ा*

श्री टेटवाल ने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने या किसी के नाम पर योजना का नामकरण नहीं किया, बल्कि उन्होंने इसे सेवा से जोड़ा, जिसमे राजभवन को लोकभवन, राजपथ को कर्तव्य पथ, रेस कोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को सेवा तीर्थ नाम का नाम दिया गया। इसी तरह भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) (2023) तीन नए भारतीय कानून हैं, जो क्रमशः भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CRPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) को बदलने के लिए लाए गए हैं।

*विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप है नया बिल*

श्री टेटवाल ने कहा हर गरीब को रोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो। गरीब, जनजाति और पिछड़ा को रोजगार मिले, उसके लिए यह क़ानून आया है, इसका उद्देश्य विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है। VB – G RAM G अधिनियम 2025, केवल एक पूर्व योजना का प्रतिस्थापन मात्र नहीं बल्कि भारत में ग्रामीण रोजगार नीति पुनःपरिभाषा है। पारदर्शिता, विकास नियोजन, वित्तीय उत्तरदायित्व और किसान संवेदनशीलता को कानून में समाहित करके यह सार्वजानिक रोजगार कार्यक्रमों में विश्वास बहाल करता है और ग्रामीण भारत को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर एक सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करता है।