उज्जैन, निरंकारी भक्तों द्वारा विक्रम विश्वविद्यालय में रोपे गए पौधों का संरक्षण किया गया। उन्हें पानी देकर आसपास को खरपतवार हटाई ओर उन्हें जीवंत रूप दिया। वही निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन सान्निध्य में महाराष्ट्र में 82 जोड़ो का विवाह सम्पन्न हुआ।
जानकारी देते उज्जैन मुखी त्रिलोक बेलानी ओर मीडिया सहायक विनोद गज्जर ने बताया कि निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन सान्निध्य में मंगलवार, 27 जनवरी को आयोजित भव्य सामूहिक विवाह समारोह महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किया गया 82 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। यह समारोह महाराष्ट्र के 59वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के विधिवत समापन के उपरांत, सांगलवाड़ी (सांगली) स्थित समागम स्थल पर आयोजित किया गया। वही उज्जैन में विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में रोपे गए पौधों के आसपास की खरपतवार हटा कर उन्हें संरक्षित किया गया। वही सामूहिक विवाह कार्यक्रम में पारंपरिक जयमाला के साथ-साथ निरंकारी विवाह की विशेष पहचान ‘सांझा-हार’ भी प्रत्येक जोड़े को मिशन के प्रतिनिधियों द्वारा पहनाया गया।
निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी ने अपने पावन आशीर्वचनों में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने नवविवाहित वर-वधुओं को शुभकामनाएँ प्रदान करते हुए गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों को समझकर आपसी सहयोग, सम्मान, प्रेम और समर्पण के साथ जीवन पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। सतगुरु माता जी ने कहा कि गृहस्थ में रहकर सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए आध्यात्मिकता की राह पर निरंतर सत्संग, सेवा एवं सिमरण से जुड़े रहें तथा एक-दूसरे के सहयोग से अपनी भक्ति को और अधिक सुदृढ़ बनाएं।
इस शुभ अवसर पर महाराष्ट्र के सांगली, सातारा, कोल्हापुर, सोलापुर, धाराशिव, मुंबई, ठाणे, पुणे, डोंबिवली, पालघर, छत्रपति संभाजीनगर, अहिल्यानगर, धुले, जलगांव, नासिक, लातूर, बीड, परभणी, नागपुर, वर्धा, गोंदिया, रत्नागिरी एवं सिंधुदुर्ग; उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, गाजीपुर एवं प्रयागराज (इलाहाबाद); कर्नाटक के बेलगावी एवं उडुप्पी (कोंडापुर); तथा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर (सरगुजा) सहित विभिन्न स्थानों से कुल 82 युगल सम्मिलित हुए। सामूहिक विवाह के उपरांत सभी के लिए समागम स्थल पर भोजन की समुचित व्यवस्था की गई थी।
