उज्जैन, समान नागरिक संहिता के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की जिला बैठक कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह द्वारा विभिन्न सामाजिक, विधिक एवं प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में समिति के सदस्यों ने समान नागरिक संहिता के संभावित स्वरूप, विभिन्न राज्यों के अनुभव, सामाजिक समरसता तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। साथ ही नागरिकों, विधि विशेषज्ञों एवं विभिन्न वर्गों से सुझाव भी प्राप्त किए गए।
बैठक में पारिवारिक कानूनों, महिलाओं के अधिकार, सामाजिक न्याय एवं संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों पर चर्चा की गई। समिति द्वारा आगामी चरणों में नागरिकों से संवाद एवं सुझाव प्राप्त करने के लिए ucc.mp.gov.in पोर्टल की जानकारी दी । बैठक में समिति सदस्य कानूनविद् श्री अनूप नायर, शिक्षाविद् श्री गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता श्री बुधपाल सिंह शामिल हुए।
बैठक में समिति सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि पारिवारिक संबंधो से ताल्लुकात रखने वाले जो कानून है, वो समान नागरिक संहिता के परिधि में आते है। मिसाल के तौर पर विवाह, विवाह विच्छेद, भरण पोषण, उत्तराधिकार है। हम सभी जानते है कि परंपरागत रूप से हमारे देश में विभिन्न प्रकार के धर्म समुदायों के लिए विभिन्न प्रकार के पारिवारिक लॉ लागू है। आजादी के बाद इनमें से कुछ कानूनों को सुधार करने की कोशिश की गई, लेकिन अभी भी बहुत से विषय ऐसे है जिनको सुधार नही किया गया है, जो परंपरागत रीति रिवाजों से चलते है। लिंग के आधार जो विभेद पर्सनल कानून में है क्या उसको बरकरार रहना चाहिए या दूर करना चाहिए? यह एक प्रश्र खड़ा होता है।
देश में समान नागरिकता लागू करने का मुद्दा सौ साल पुराना है। देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को पढ़ेगें तो पाएंगे कि पहली बार 1929 के लाहौर सेशन में इस पर बात उठ चुकी है। बाद में ऑलइंडिया वीमैनस की सदस्याओं ने जोर दिया कि विभिन्न धर्म के जो परिवार से संबंधित कायदे-कानून बनाए गए है,उसमें स्त्रीयों के साथ विभेद किया गया है, उसे दूर करना चाहिए।
बैठक में राज्यसभा सांसद श्री उमेश नाथ महाराज, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कमला कुंवर,महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह,पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा,प्राधिकरण उपाध्यक्ष श्री मुकेश यादव, श्री राजेश धाकड़, श्री संजय अग्रवाल,श्री राजेश सिंह कुशवाह सहित विभिन्न समुदाय, धर्म से जुड़े लोग मौजूद रहे। बैठक के अंत में आभार समिति सचिव श्री अजय सिंह ने माना।
*नागरिकों और जनप्रतिधियों के सुझाव*
मेरे द्वारा विगत 40 वर्षो से जाति, पंथ, संप्रदाय तोड़े, राष्ट्र को जोडऩे वाला अभियान चलाया हुआ है। सभी लोग एकात्मक, सहिष्णुता के साथ रहें। विश्व का मानव समाज एक है तो देश में अनेकता में एकता की स्थिति लाने के लिए समान नागरिक संहिता लागू की जाना चाहिए।
– राज्यसभा सांसद, संत बालयोगी श्री उमेशनाथ महाराज
हमारा देश ऋषि परंपरा का देश है। ऋषि पंथ मनाने वालों की संख्या बढ़ी है तो धर्म पंथ काहे का। राष्ट्र पहले है। सभी समान होना चाहिए। बेटियों को अधिकार और सम्मान मिले। समान नागरिक संहिता तुरंत लागू की जाना चाहिए।
-विधायक, श्री अनिल जैन कालूहेड़ा
देश की आजादी के साथ ही समान नागरिक संहिता लागू होना थी। यह हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। इसलिए इसे तुरंत लागू करना चाहिए। इसमें वैज्ञानिक तत्वों को परखकर लागू करें, जिसमें सभी को समान अधिकार हो। हमारी पीढ़ी को हमारे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा जाए।
-नगर निगम अध्यक्ष, श्रीमती कलावती यादव
समान नागरिक संहिता भारत में रहने वाले नागरिकों के लिए कानून समान बनाती है। इसको लेकर एक बहस देशभर में छिड़ी हुई है। इसमें लिंग भेद समाप्त होना चाहिए धर्मभेद, जातिभेद, जातियों के जो अगडे-पिछड़े का भेदभाव समाप्त हो। विवाह की उम्र समान हो, महिलाओं को अधिकार देना और सभी जाति एक समान होना चाहिए।भेदभाव समाप्त होना जरूरी है। महिलाओं के लिए बराबर के अधिकार की बात होना चाहिए। देश में सभी के लिए लिंग भेद के बिना विवाह की उम्र भी समान होना चाहिए।
-विक्रम विश्वविद्यालय कार्यपरिषद सदस्य, श्री राजेश सिंह कुशवाह
देश में समान नागरिक संहिता के लिए एक प्रफार्मा बनाया जाए जिससे लिखित में भी सुझाव दे सकें। समान नागरिक संहिता मेंं ऐसी बैठकों से कंट्रोवर्सी दूर हो सकती है।
-शहर काजी,श्री खलिकुर्ररहमान
समान नागरिक संहिता निश्चित ही लागू होना चाहिए इसमें बच्चों की विवाह की उम्र तय होना चाहिए। बच्चे,बालिकाओं और महिलाओं के अधिकारों को भी शामिल किया जाए।
-जिला बाल विकास समिति सदस्य,श्रीमती प्रीति गोयल
