विश्व जल दिवस पर विक्रम विश्वविद्यालय में बाल जलदूतों का सम्मान

उज्जैन, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं विश्व जल दिवस के अवसर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयोजन हुआ। इस अवसर पर बाल जलदूतों का स्वागत किया गया और पानी के महत्व को समझाने के लिए कई महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए। जल ही कल है, “घी सस्ता, पानी महंगा” जैसी महत्वपूर्ण रचनात्मक युक्तियों का भावार्थ नई पीढ़ियों को तत्काल समझाना ही होगा, जल ईश्वरीय वरदान है।

बाल जलदूतों का स्वागत
यूपीएस एवं सेंट मेरी कांवेंट स्कूल, उज्जैन की चौथी कक्षा के नवप्रवेशित बाल जलदूतों विहान-यथार्थ आत्मज डॉ. अजय ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। इन बाल जलदूतों का मुख्य उद्देश्य जल के महत्व को समझना और उसे बचाने के लिए समाज में जागरूकता फैलाना था।

विश्व जल दिवस और जल के महत्व पर विचार
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, स्टाफ और विक्रम विश्वविद्यालय के कार्य परिषद के सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र के संपोषणीय लक्ष्य क्रमांक 6 और 3 के नवाचारों की सराहना की। उन्होंने अपने शुभकामना वक्तव्य में जल के महत्व को समझाने पर बल दिया और जल संचयन की दिशा में किए गए प्रयासों को सराहा।

जल संचयन की आवश्यकता पर गहन विचार
प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता ने जल संचयन के महत्व पर जोर देते हुए, मालवा, निमाड़, महाकौशल, बुंदेलखंड, बघेलखंड, हाड़ौती, मारवाड़ और थार के रेगिस्तानी क्षेत्रों में जल संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से जैसलमेर से लेकर सुदूर दक्षिण और पूर्वी भारत के क्षेत्रों में घटती वर्षा और गिरते ग्राउंड वॉटर स्तर पर गहन चिंतन की आवश्यकता की बात की।

विक्रम विश्वविद्यालय के कार्य परिषद सदस्य, प्रो. डॉ. दीपक गुप्ता, प्रो. डॉ. कामरान सुल्तान, प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, प्रो. डॉ. डी.डी. बेदिया, डॉ. सचिन राय, डॉ. नयनतारा डामोर, श्री राकेश खोती, गोविंद तोमर, ओम प्रकाश यादव, सत्यनारायण मालवीय, चिराग मिसाल, चेतन पटेल, और सावन मालवीय ने जल संचयन के लिए संकल्प लिया और जल दिवस 2025 की थीम “ग्लेशियर संरक्षण” के अनुरूप जल संचयन के महत्व पर विचार किया।

सम्राट विक्रम की लघु जलकथा
कार्यक्रम के अंत में निदेशक प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता ने सम्राट विक्रम से जुड़ी एक लघु जलकथा प्रस्तुत की। उन्होंने समुद्र देवता द्वारा सम्राट विक्रम को महायज्ञ सम्पन्न कराने के लिए शुभकामनाओं का प्रसंग साझा किया। इस लघु जलकथा में यह संदेश दिया गया कि जल की प्रत्येक बूंद में देवता का वास है और यज्ञ में प्रयुक्त जल में भी वे उपस्थित रहते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अजय रघुवंशी ने सभी उपस्थितगण का आभार व्यक्त किया और जल संरक्षण के प्रयासों को मजबूत बनाने की अपील की।

इस आयोजन ने जल के महत्व को समझने और बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।