उज्जैन में आयोजित राष्ट्रीय “विज्ञान महाकुंभ 2025” के सत्रों में मध्यप्रदेश में “इसरो”जैसा वैज्ञानिक एवं अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने और वैज्ञानिक हब बनाने की हुई घोषणा

उज्जैन, मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी परिषद्, भोपाल,विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन एवं महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय विक्रमोत्सव के अंतर्गत उज्जैन में आयोजित अखिल भारतीय विज्ञान महाकुम्भ 2025 के विभिन्न सत्रों में मध्यप्रदेश में “इसरो” जैसा वैज्ञानिक एवं अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने और वैज्ञानिक हब बनाने की घोषणा के साथ ही राज्य में स्पेस पॉलिसी को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने, कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक और वैज्ञानिक विधियों को अपनाने,शिक्षा प्रणाली में वैज्ञानिक सोच और प्रयोगात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा निजी और सरकारी संस्थानों के बीच विज्ञान और शोध के लिए सहयोग बढ़ाने के साथ ही वैज्ञानिकों ने विज्ञान के अनछुए विषयों पर तार्किक रूप से अपने- अपने विषयों की प्रस्तुति दी।

          विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरू प्रो अर्पण भारद्वाज ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन और कालिदास अकादमी उज्जैन में आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक सम्मेलन, विज्ञान उत्सव एवं 40 वा मध्य प्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन के सत्रों में जानकारी देते हुए बताया कि, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय डाॅ मोहन यादव ने वर्चुअल उपस्थित रहकर कहा कि वैज्ञानिक समाज और विज्ञान प्रौद्योगिकी से जुड़े संस्थानों के सहयोग से मध्यप्रदेश में इसरो की तरह एक केंद्र के विकास पर भी विचार किया जाएगा। वर्तमान में दक्षिण भारत ही ऐसी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। मध्यप्रदेश में चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में भी विज्ञान का प्रयोग बढ़ रहा है। हाल ही में सम्पन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आईटी विभाग के माध्यम से 4 महत्वपूर्ण नीतियां मध्यप्रदेश ड्रोन सवंर्धन और उद्योग नीति-2025, मध्यप्रदेश एनीमेशन, विजुअल एफैक्टस, गैमिंग कामिक्स और विस्तारित रियलिटी (एवीजीसी- एक्सआर) नीति-2025, मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर नीति-2025 और मध्यप्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी)नीति-2025 घोषित की गई हैं। वैज्ञानिक सम्मेलन में स्पेस पॉलिसी बनाने का सुझाव आया है। इस नाते मध्यप्रदेश की स्पेस पॉलिसी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा वैज्ञानिक सम्मेलन और राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन की थीम “विकास की बात विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार एक साथ”प्रासंगिक है। 

           इस ” विज्ञान महाकुंभ 2025″ में देशभर के 250 से अधिक शीर्षस्थ वैज्ञानिक शामिल हुए हैं, साथ ही विज्ञानं के 17 विषयों से अधिक शोधपत्रो का वाचन किया और विशेष रूप से भारतीय ज्ञान परम्परा एवं समग्र विकास, इनोवेशन एवं स्टार्टअप , स्टेम शिक्षा एवं लोक व्यापीकरण, नवीन एवं पारम्परिक पद्यति, टेक्नोलॉजी फॉर सेवा आदि विषयों पर परिचर्चा आयोजन और विशेष सत्रों में वैज्ञानिकों ने अपनी तथ्यात्मक प्रस्तुति दी।

           इन सत्रों में मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी परिषद्, भोपाल के महानिदेशक डॉ अनिल कोठारी, महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक एवं मुख्यमंत्री  के संस्कृति  सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी एवं विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलगुरु प्रो अर्पण भारद्वाज उपस्थित रहे ।

           आयोजन के विभिन्न सत्रों में यह निष्कर्ष सामने आये कि,मध्यप्रदेश में स्पेस पॉलिसी को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक और वैज्ञानिक विधियों को अपनाने पर जोर दिया जाए।शिक्षा प्रणाली में वैज्ञानिक सोच और प्रयोगात्मक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।निजी और सरकारी संस्थानों के बीच विज्ञान और शोध के लिए सहयोग बढ़ाया जाए।

           शोध निष्कर्षों के अनुसार विज्ञान और तकनीकी नवाचारों का भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान होगा।शिक्षा प्रणाली में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी और निजी सहयोग आवश्यक है।डिजिटल तकनीक और विज्ञान के समावेश से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

            निष्कर्ष में यह बात भी सामने आई कि,STEM शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और रोचक बनाया जाना चाहिए।स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।डिजिटल टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग के क्षेत्र में नए अवसर तलाशे जाने चाहिए।प्रयोग और प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देकर छात्रों में तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच विकसित करनी चाहिए।विज्ञान और नवाचार के बिना भविष्य अधूरा है।

             समेलन में छह तकनीकी सत्र हुए जिनमें प्रथमयह सत्र आधुनिक प्रोद्योगिकी विकसित भारत 2047 विषय पर आधारित रहा,इसमें डॉ. प्रकाश चौहान, निदेशक, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद का अन्तरिक्ष विज्ञान एवं भारत विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ | द्वितीय सत्र स्टेम शिक्षा एवं लोक व्यापीकरण नवीन एवं पारम्परिक पद्धति पर आधारित था इसमें प्रो. मनीष जैन, प्रमुख, सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग, भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, गाँधीनगर ने क्रिएटिव लर्निंग फॉर स्टेम एजुकेशन पर व्याख्यान दिया,तृतीय सत्र आईडिया इनोवेशन एंड स्टार्टअप आत्मनिर्भर भारत विषय पर आधारित रहा, इसमें पद्म श्री डॉ जनक पलटा मैकगिलिगन, निदेशिका, जिम्मी मैक गिलिगन सेंटर, इंदौर का विकसित भारत के लिए ग्रामीण और आदिवासी युवाओं का सस्टनेबल प्रोद्योगिकियों के साथ सशक्तिकरण विषय पर विशेष  व्याख्यान हुआ |चतुर्थ सत्र भारत ज्ञान- विज्ञान परम्परा एवं समग्र विकास पर आधारित रहा,इसमें डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन सचिव, विज्ञान भारती, नई दिल्ली का स्वदेशी विज्ञान आन्दोलन एवं विज्ञान भारती विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ । पंचम सत्र टेक्नोलॉजी फॉर सेवा विषय पर आधारित रहा इसमें डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा, एमेरिटस वैज्ञानिक रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन, रक्षा मंत्रालय. भारत सरकार नवीन रक्षा तंत्र प्रणाली और भारत विषय पर व्याख्यान दिया गया | षष्ठम सत्र अनुसन्धान एवं विकास : नये अवसर एवं चुनोतियाँ विषय पर आधारित था| इसमें पद्म श्री डॉ जितेन्द्र के बजाज का भारतीय देशज ज्ञान परम्परा – वैज्ञानिक दृष्टिकोण विषय पर व्याख्यान हुआ |

            डॉ. अरविंद रानाडे निदेशक-नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी नवाचारों को समाज में प्रभावी बनाने की आवश्यकता।स्टार्टअप इकोसिस्टम और उद्यमिता को विज्ञान से जोड़ने पर जोर दिया।स्कूल और कॉलेज स्तर पर वैज्ञानिक सोच को बढ़ाने के लिए विज्ञान प्रदर्शनियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी में भारत की प्रगति का उल्लेख किया।

            डाॅ विवेकानंद पई राष्ट्रीय महासचिव- विज्ञान भारती कोच्चि,केरल ने,भारत की ऐतिहासिक वैज्ञानिक यात्रा पर प्रकाश डाला।आर्यभट्ट, भास्कराचार्य और चाणक्य जैसे वैज्ञानिकों की उपलब्धियों की चर्चा।भारत में फार्मास्युटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी और ऊर्जा क्षेत्र में हो रही प्रगति को विज्ञान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।भविष्य में विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से भारत के वैश्विक नेतृत्व की संभावना को उजागर किया।

          देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के कुलपति प्रो राकेश सिंघई ने विश्वविद्यालयों को नवाचार और शोध के केंद्र बनाने की आवश्यकता बताई।रिसर्च फंडिंग, प्रयोगशालाएं और उद्योगों के साथ कोलैबोरेशन बढ़ाने का सुझाव।डिजिटल लर्निंग, वर्चुअल लैब और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर जोर दिया ।आपने मध्यप्रदेश में रिसर्च पॉलिसी लागू करने की जरूरत बताई ।

         डाॅ गोवर्धन दास निदेशक- भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल ने वैज्ञानिक सोच को विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई ।सरकारी और निजी संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ाने की सिफारिश की।कृषि, अंतरिक्ष और तकनीकी नवाचारों पर विशेष ध्यान देने की अपील की ।

      प्रो. मनीष जैन प्रमुख, सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग, IIT गांधीनगर ने विज्ञान को आनंद और समझ के साथ जोड़ने की जरूरत पर बल दिया।कहा कि कोई भी कार्य ऐसा होना चाहिए जो लोगों के दिल को छू जाए और अर्थव्यवस्था में विज्ञान का योगदान बढ़ाए।

       डाॅ उमेश कुमार निदेशक, नेहरू विज्ञान केंद्र, मुंबई) ने गणित और विज्ञान को गहराई से समझने पर जोर दिया।बताया कि विज्ञान केवल याद करने का विषय नहीं है, बल्कि इसे उदाहरणों के माध्यम से सीखना अधिक प्रभावी होता है।

          डॉ. के. वेंकटरमन विभागाध्यक्ष भौतिक विभाग, पीएमबी गुजराती विज्ञान महाविद्यालय, इंदौर ने विज्ञान में सत्य की खोज को भारतीय परंपरा का हिस्सा बताया।छात्रों और शोधकर्ताओं को तार्किक सोच और अनुसंधान की संस्कृति को अपनाने की सलाह दी।

        डाॅ रामनाथ नाराथे ने डिजिटल युग में मार्केटिंग के बदलते स्वरूप पर चर्चा।इन्होंने सोशल मीडिया मार्केटिंग, ईमेल मार्केटिंग, इंफ्लुएंसर मार्केटिंग, SEO, और एफिलिएट मार्केटिंग के बारे में जानकारी दी।डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से ऑनलाइन बिजनेस को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई।

           पद्मश्री डॉ. जनक पल्टा महिलीगन निदेशिका- जिम्मी मैकगिलिगन सेन्टर इंदौर ने ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को सस्टेनेबल प्रौद्योगिकी के साथ सशक्त बनाने पर जोर दिया।इन्होंने बताया कि,सोलर कुकर निर्माण के माध्यम से महिलाओं को धुएं से मुक्त भोजन पकाने की सुविधा दी गई । लड़कियों की शिक्षा, खेती और आत्मनिर्भरता को भारत के विकास की कुंजी बताया और महिलाओं के उत्थान को समाज और देश की प्रगति के लिए आवश्यक बताया।

         डॉ. सुधीर मिश्रा एमेरिटस वैज्ञानिक, DRDO ने नवाचार और आविष्कार को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों (इन्वेस्टर्स) की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। आपने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यह आविष्कार और नवाचार का युग है और नई सोच रखने वाले ही सफल होंगे।

        डॉ. एन. पी. शुक्ला मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल ने मानसिक गुलामी से बाहर निकलने और आत्मविश्वास बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। आपने स्टेम सेल टेक्नोलॉजी पर जानकारी दी, जिससे बीमारी से ग्रसित अंगों को पुनः ठीक किया जा सकता है।आपने महाभारत में विज्ञान और जीव विज्ञान के प्रमाणों का उल्लेख किया और विज्ञान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की अपील की।

           *स्कूल विद्यार्थियों के लिए स्टेम कार्यशाला* स्टेम ( साइंस टेक्नोलॉजी एंड मैथेमेटिक्स कार्यशाला स्कूली छात्रों के लिए आयोजित की गई जिसमें विद्यार्थियों द्वारा प्रतिभागिता की गई इस कार्यशाला में विज्ञान से जुड़े रोचक प्रयोग कराए गए जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी के द्वारा भी यह प्रयोग किया गया। साथ ही  इस प्रयोग के विज्ञान को समझाया गया।