उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य की पूण्य भूमि पर एक और नया अध्याय लिखा गया है। यह बात माननीय राज्यपाल श्री मंगु भाई पटेल ने मुख्य अतिथी के रूप में आज उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज के शुभारंभ के अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंदीय विधि और न्याय एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल, प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनिकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दरसिंह परमार उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि के रूप मे संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री मंगु भाई पटेल ने सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज के शुभारंभ एवं विक्रम संवत 2080 की शुरूआत पर शुभकामना देते हुए कहा कि जहां महाकाल स्वय विराजते है, जहां कालिदास की अमर रचना जन्मी है और जहा विक्रमादित्य ने न्याय की सम्पूर्ण आधारशिला रखी है, इस पूण्य भूमि पर ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज’ का शुभारंभ कर आज एक और इतिहास रचा गया है। उन्हौने कहा कि महाराजवाड़ा के इस प्राचीन भवन को केवल पुनजीवित करना एवं निर्माण करना नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक विरासत को संवारने का संकल्प है। यह हेरिटेज आधुनिकता और परंपरा का अद्वितीय संगम है यहा पर्यटकों के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं मिलेगी। एक – एक कक्ष को आकर्षक नाम भी दिया गया है। उज्जैन का यह हेरिटेज पर्यटन के साथ-साथ भगवान महाकाल के भक्तों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा। पर्यटकों के लिए यहां आयुर्वेदिक पद्धति पंचकर्म जैसी अनेक सुविधाओं की भी व्यवस्थाए की गई है। उन्होनें हेरिटेज के निर्माण पर मुख्यमंत्री को बधाई भी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश विरासत से विकास की ओर अगसर है आज से नये युग का प्रादुरभाव हो रहा है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का काल रामराज्य की तरह रहा है। उन्होनें कहा कि सनातन संस्कृति से श्रेष्ठ परमंपराओं को पुन: जीवित किया जाना चाहिए। आज उज्जैन का गौरव दिवस है, हमें अतित से वर्तमान तक व्यवस्थाओं पर गौरव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सन 1235 में इलतुत्मिश ने उज्जैन नगर सहित उत्तर भारत के राज्यों को भी तहस नहस किया था। उज्जैन में शिवाजी महाराज एवं महाराज सिंधीया के काल में अनेक इमारतों का निर्माण हुआ है। उज्जैन में प्राचीन गौरवशाली इतिहास कि झलक दिखती है। ऐतिहासिक इमारतों, जिनका पहले शासकिय कार्यालयों के तौर पर उपयोग होता रहा है, को विरासत के रूप मे संजोने का काम किया जा रहा है। आज ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज’ का निर्माण महाराजवाड़ा के पुराने भवन का जीर्णोद्धार कर किया गया है। यहां पूर्व मे विद्यालय संचालित होता था।
हेरिटेज के निर्माण से इतिहास जीवंत हो रहा है, यहां आने वाले पर्यटकों को आनंद महसूस होगा। पर्यटकों के लिए हेरिटेज में एआई का इस्तमाल कर अच्छी व्यवस्थाएं की गई है। महाकांल प्रागण में बने इस हेरिटेज से पर्यटकों को एवं श्रद्धालुओं को सुविधा जनक तरीके से महाकाल के दर्शन होगे ।
इस अवसर पर केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री मेघवाल ने संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान के बिकानेर जिले के भीकमपुर में भी एक बड़ा महल है। यह भी विक्रमादित्य कालीन प्रतित होता है, यह शोध का विषय है। उन्होने कहा कि वे न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य की नगरी में सिखने के लिए आए है।
*हेरिटेज का शुभारंभ*
प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगु भाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज का शुभारंभ, परंपरागत पूजा अर्चना कर एवं फिता खोल कर किया। इसके उपरांत अतिथियों ने हेरिटेज के विभिन्न कक्षों का अवलोकन किया।
इस अवसर पर क्षेत्रीय सांसद श्री अनिल फिरोजिया, क्षेत्रीय विधायक श्री अनिल जैन कालूखेड़ा, श्री शिवप्रकाश , महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव, प्रमुख सचिव श्री शिवशेखर शुक्ल सहित गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।
*”सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज” उज्जैन का संक्षिप्त विवरण*
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पर्यटक सुविधाओं के विस्तार की श्रृंखला में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में 17 करोड़ 90 लाख रूपये की लागत से पर्यटकों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त “सम्राट विक्रमदित्य द हेरिटेज” का निर्माण किया गया है।
इस हेरिटेज इकाई के अंतर्गत महाराजवाडा- फाईन डाइन रेस्टोरेंट, कैलाश- रूफटॉप रेस्टोरेंट, महानस- ओल्ड वाडारेस्टोरेंट, सूत्रधार- रिसेप्शन/लॉबी, अशोक मंडप-व्ही.आय.पी. लॉबी, धनवंतरि पंचकर्म, अमरकोष- लायब्रेरी, भर्तृहरि वीथिका – आर्ट गेलरी तथा कुमुद्वती- सॉवनीर शॉप, गार्डन, लैंड स्केपिंग एवं पार्किंग आदि सुविधाएं विकसित की गयी हैं।