उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय युवा उत्सव का वर्चुअली शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आज नई ऊर्जा, नए जोश और नए संकल्पों के साथ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। इस आयोजन में शामिल युवा केवल सहभागी नहीं, बल्कि भविष्य के मध्य प्रदेश के सशक्त साझेदार हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय युवा उत्सव के शुभारंभ अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है और साथ ही सबसे तेजी से प्रगति करने वाली अर्थव्यवस्था भी बन रहा है। इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में मध्य प्रदेश भी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है और युवाओं की इसमें निर्णायक भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को नई शिक्षा नीति मिली है जिसकी प्रतीक्षा दशकों से थी। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने इसे पूरी सक्रियता से लागू किया है।
उन्होंने ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2020 से नई शिक्षा नीति लागू की गई है। इसके चलते कौशल विकास, स्टार्टअप, स्वरोजगार और नवाचार को प्रोत्साहन मिला है। उन्होंने कहा कि उद्योग और रोजगार वर्ष के अंतर्गत इस वर्ष लगभग 8.30 लाख करोड़ रुपए के भूमि-पूजन और लोकार्पण किए गए हैं, जिससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। कृषि क्षेत्र के बाद टेक्सटाइल उद्योग सर्वाधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। कपास से लेकर धागा, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स तक का संपूर्ण उत्पादन तंत्र मध्य प्रदेश में विकसित किया जा रहा है। इससे किसानों, कारीगरों और उद्योग जगत को लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के उत्पाद देश-विदेश तक पहुंच सकेंगे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से उद्योगों की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने का आग्रह किया, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ ही रोजगार के अवसर मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु और प्रशासन के सम्मुख एक महत्वपूर्ण विजन रखा। उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं से विशेष आग्रह किया कि कौशल-आधारित पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय में ऐसे प्रोफेशनल और स्किल-आधारित (Skill-based) पाठ्यक्रम लाए जाएं जो सीधे तौर पर उद्योगों की जरूरतों को पूरा करें।

उच्च शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन का संकल्प – उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार
राज्य स्तरीय युवा उत्सव ‘अभ्युदय’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने शिक्षा जगत के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं और भविष्य का विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने ओजस्वी भाषण में न केवल विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का वादा किया बल्कि शिक्षा प्रणाली में किए गए ऐतिहासिक सुधारों की जानकारी भी साझा की।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में एक अत्याधुनिक खेल स्टेडियम (Sports Complex) विकसित किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने कुलगुरु को तत्काल प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए और आश्वस्त किया कि शासन इसके लिए आवश्यक फंड की कोई कमी नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार पर संबोधित करते हुए श्री परमार ने कहा कि अब तक चली आ रही 70:30 (थ्योरी और प्रैक्टिकल) की परीक्षा प्रणाली को अब संशोधित कर 50:50 कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब विद्यार्थी 50% समय प्रैक्टिकल स्किल ज्ञान को देगा, तभी वह उद्योग और स्वरोजगार के लिए तैयार हो पाएगा।
मंत्री श्री परमार ने कहा कि पहले भारत के गौरवशाली इतिहास और वैज्ञानिक ज्ञान को पाठ्यक्रमों में उचित स्थान नहीं मिला था। अब नई शिक्षा नीति के माध्यम से हमारे प्राचीन गणितज्ञों, खगोलविदों और आयुर्वेद के ज्ञान को फिर से स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी वर्षों में युवा उत्सव में कोरियोग्राफी, मेहंदी और वीडियोग्राफी जैसे डिजिटल और रचनात्मक कौशलों को भी जोड़ा जाएगा ताकि कला के साथ-साथ रोजगार के द्वार भी खुलें। उन्होंने उपस्थित युवाओं को पर्यावरण की रक्षा के लिए प्लास्टिक का पूर्ण बहिष्कार करने, जल की प्रत्येक बूंद को बचाने, अनावश्यक बिजली का उपयोग नहीं करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेज की स्थापना की गई है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही एग्रीकल्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिनटेक जैसे नए विषयों को पाठ्यक्रमों में शामिल कर मध्य प्रदेश को आधुनिक ज्ञान आधारित राज्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।
मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालय भाषा जोड़ो अभियान में भागीदार बनेगें
उच्च शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि राज्य के विश्वविद्यालयों में 13 भारतीय भाषाओं, तमिल, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, असमिया, उड़िया, तेलुगु, सिंधी और मणिपुरी को पढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसे क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा जाएगा ताकि विद्यार्थी अन्य राज्यों की भाषा और संस्कृति से संवाद कर सकें। यह पहल राष्ट्रीय एकता और भाषाई समन्वय को सशक्त करेगी।
भारतीय परंपरा ही हमारी वास्तविक पहचान और सुरक्षा का कवच है — बालयोगी श्री उमेशनाथ जी महाराज
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद बालयोगी श्री उमेशनाथ जी महाराज ने शिक्षा के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल डिग्री प्राप्त कर लेना ही शिक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि माता के प्रेम और आंचल से जुड़ी पहली शिक्षा ही बालक के जीवन की नींव होती है, जिसके बाद गुरु परंपरा के साथ मिलने वाली दीक्षा और शिक्षा उसके चरित्र का निर्माण करती है। महाराज श्री ने जोर देकर कहा कि प्राचीन काल में गुरु के ‘गुरु मंत्र’ से ही विद्यार्थियों में वह संस्कार जागृत किए जाते थे, जो उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने की शक्ति देते थे। कार्यक्रम में अतिथि के रुप में विधायक श्री अनिल जैन कालूहेडा, महापौर श्री मुकेश टटवाल, कुलगुरु डॉ. अमित कुमार शर्मा, कार्यपरिषद सदस्य श्री रुपचंद पमनानी भी मौजूद थे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री अभिषेक शुक्ला ने ‘शिव वंदना’ प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, प्रो. डी.एम. कुमावत ने किया। स्वागत भाषण प्रो. एस.के. मिश्रा ने दिया। कार्यक्रम का संचालन श्री दिलीप तिवारी ने किया और आभार कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने माना।
सांस्कृतिक शोभायात्रा में शामिल हुए विद्यार्थी
युवा उत्सव का शुभारंभ के पश्चात विश्वविद्यालय परिसर से टावर चौक तक एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में प्रदेश के 15 विश्वविद्यालयों के दल अपने ध्वजों के साथ शामिल हुए। इस दौरान जनजातीय कला, लोक नृत्य, झांकियां और देवी-देवताओं (काली माता, शिव जी) के स्वरूपों ने मध्यप्रदेश की विविध संस्कृति को जीवंत कर दिया।
