उज्जैन, उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास द्वारा अवगत कराया गया है कि वर्तमान में गेहूं की फसल कटाई अधिकांशतः कम्बाईन हार्वेस्टर द्वारा की जाती है। सामान्यतः कृषक फसल कटाई उपरांत बचे हुए गेहूं के डंठलों (नरवाई) से भूसा न बनाकर उसे जला देते हैं। जबकि कृषक विभिन्न उन्नत तकनीकों जैसे स्ट्रॉ रीपर से बचे हुए फसल अवशेष का भूसा बनाना, स्ट्रॉ रीपर उपरांत शेष डंठलों/खापी को रोटावेटर/मल्वर/कल्टीवेटर/देशी पाटा के माध्यम से भूमि में मिला देना एवं बेस्ट डिकंपोजर/पूसा डिकपोजर यूरिया छिड़काव करके नरवाई को जल्दी खाद में परिवर्तित करना आदि जैसी तकनीकों का उपयोग करके फसल अवशेष का प्रबंधन कर सकते है। भूसे का उपयोग पशु आहार के साथ ही अन्य उद्योगों में किया जा सकता है।
कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान दृष्टिगत जनहित में नरवाई जलाने पर रोक लगाई है। खेत की आग के अनियंत्रित होने पर जन, धन, संपत्ति, प्राकृतिक वनस्पति एवं जीव जंतु आदि नष्ट हो जाते है, जिससे व्यापक नुकसान होता है। खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु इससे नष्ट होते हैं जिससे खेत की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है एवं उत्पादन प्रभावित हो रहा है। खेत में पड़ा कचरा, भूसा, डंठल सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं। जिन्हें जलाकर नष्ट करना ऊर्जा को नष्ट करना है। आग लगाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
अतः उपरोक्त परिस्थितियों में जन सामान्य के हित, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, पर्यावरण की हानि रोकने एवं लोक व्यवस्था बनाये रखने के लिए कलेक्टर श्री सिंह द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत उज्जैन जिले की सीमा में गेहूं एवं अन्य फसलों के अवशेष (नरवाई) में आग लगाये जाने पर प्रतिबंध लगाया है।
फसलों की कटाई में प्रयुक्त होने वाले प्रत्येक कम्बाईन हार्वेस्टर के साथ भूसा तैयार करने के लिए भूसा मशीन अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाए। जिसकी की सतत् निगरानी जिला परिवहन अधिकारी, कृषि एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा की जाएगी। बिना स्ट्रा रीपर/स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कम्बाईन हार्वेस्टर चलाये जाने पर मशीन संचालक पर राशि 25,000/- रुपये का अर्थदण्ड या हार्वेस्टर जप्ती की कार्यवाही क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा की जाएगी।
जिले के एवं अन्य राज्यों से आने वाले समस्त हार्वेस्टर संचालकों को यह अनिवार्य होगा की वह अपनी स्वयं की जानकारी व मशीन की जानकारी (हार्वेस्टर/वाहन नं., स्वामी का नाम, संपर्क नं.), कार्यक्षेत्र आदि की सूचना सम्बंधित थाना में दर्ज करायेंगे। इसके लिए थाना प्रभारी द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
पर्यावरण विभाग के आदेश अनुसार नरवाई में आग लगाने की घटनाओं को प्रतिबंधित कर दण्ड अधिरोपित करने का प्रावधान किया गया है। नोटिफिकेशन से पर्यावरण सुरक्षा के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के क्रम में Air Prevention & Control of Pollution Act 1981 के अंतर्गत प्रदेश में फसलों विशेषतः गेहूं की फसल कटाई उपरांत फसल अवशेषों को खेतों में जलाये जाने के लिए प्रतिबंधित किया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में लागू किये जाने के निर्देश हैं।
निर्देशों का उल्लंघन किये जाने पर व्यक्ति/निकाय को आदेश के प्रावधान अनुसार पर्यावरण क्षति पूर्ति अर्थदण्ड राशि देय होगी। कृषक जिनके पास 02 एकड़ से कम जमीन है, उन्हें 2,500/- रू. प्रति घटना पर्यावरण क्षति पूर्ति अर्थदण्ड देय होगा। कृषक जिनके पास 02 एकड़ से अधिक एवं 05 एकड़ से कम जमीन है, उन्हें 5,000/- रू. प्रति घटना पर्यावरण क्षति पूर्ति अर्थदण्ड देय होगा। कृषक जिनके पास 05 एकड़ से अधिक जमीन है उन्हें 15,000/- रू. प्रति घटना पर्यावरण क्षति पूर्ति अर्थदण्ड देय होगा।