उज्जैन, मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मां शिप्रा के प्रांगण में आज हम आस्था, प्रकृति और जल के प्रति कृतज्ञता का महोत्सव मना रहे हैं। नदियाँ धमनियों की तरह होती है और देश-प्रदेश को जीवन प्रदान करती है। मां शिप्रा उज्जैन को जीवन प्रदान करती हैं । उन्होंने कहा कि रामघाट अद्भुत आयोजन का साक्षी बन रहा है। एक तरफ मां गंगा का अवतरण दिवस है, तो दूसरी तरफ मोक्षदायिनी मां क्षिप्रा की दो दिवसीय पावन ‘तीर्थ परिक्रमा’ का संकल्प पूर्ण हो रहा है।मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में सूर्यनारायण भगवान ने तीर्थार्थियों को परीक्षा ली लेकिन मां शिप्रा के आशीर्वाद से शिप्रा परिक्रमा सफलतापूर्वक पूर्ण हुई। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने यह उद्बोधन रामघाट पर मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा के समापन अवसर पर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मां क्षिप्रा से प्रार्थना है कि अवंतिका नगरी को भव्य और दिव्य बनाने का आशीर्वाद सदैव प्रदान करती रहें। मां क्षिप्रा के आशीष और बाबा महाकाल की कृपा से सिंहस्थ 2028 का अभूतपूर्व आयोजन करेंगे। सिंहस्थ 2028 में दुनिया भारत की आध्यात्मिक समृद्धता का दर्शन करेगी। सिंहस्थ 2028 का वैभवशाली और विराट आयोजन वैश्विक स्तर पर होगा। इस महाआयोजन के लिए हजारों करोड़ रुपए के विकास कार्य शासन द्वारा किए जा रहे हैं।
मोक्षदायनी मां क्षिप्रा नदी के निर्मल और अविरल जल में सुगमता से स्नान और सुविधा की दृष्टि से कान्ह क्लोज डक्ट,सेवरखेड़ी- सिलारखेड़ी परियोजनाओं पर कार्य किए जा रहे हैं।भीड़ प्रबंधन के लिए आंतरिक मार्गों का चौड़ीकरण,स्नान के लिए 30 किमी नवीन घाटों का निर्माण शिप्रा के दोनों किनारों पर किया जा रहा है। क्षिप्रा नदी पर ब्रिजों की श्रंखलाओं का निर्माण किया जा रहा है।श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए नवीन सड़क, रेल और हवाई मार्गों से उज्जैन को जोड़ा जा रहा है।
*“जल गंगा संवर्धन” जनभागीदारी से चलने वाला प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन बन गया है*
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में पूरे देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह केवल शासन की पहल नहीं, बल्कि जनभागीदारी से चलने वाला एक जनआंदोलन बन चुका है। “जल गंगा संवर्धन” जैसे अभियान हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी पुनर्जीवित कर रहे हैं। ये उत्कृष्ट कार्य सभी जिलों में जारी है। नदी जोड़ो अभियान में मध्यप्रदेश अग्रणी है।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि पावन नगरी उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली परंपरा से जुड़ी है। लगभग 2 हजार वर्ष पूर्व उन्होंने धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण कर भारत की धरा को नई पहचान दी। एक हजार साल पहले राजा भोज का समय था। उज्जैन, धार, इंदौर, भोपाल तक परमार काल में शासन रहा। इस दौर में धार में मां सरस्वती ( वाग्देवी) का मंदिर और शिक्षा का स्थल बना। उसी सांस्कृतिक धारा को आगे बढ़ाते हुए आज देश में आस्था का एक नया युग आया है, जब न्यायालय के निर्णय के पश्चात प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ—यह पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। इसी तरह अब धार में मां सरस्वती लोक का निर्माण किया जाएगा।
*जल संरक्षण केवल सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा*
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मां शिप्रा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था, परंपरा और जीवन का आधार है। लगभग 137 किलोमीटर लंबी इस पावन धारा में त्रिवेणी से लेकर सिद्धवट तक अनेक तीर्थ स्थित हैं, जहां दर्शन और पूजन से जीवन को सार्थक माना गया है। हम जब मां शिप्रा में एक पुष्प अर्पित करते हैं, तो वह केवल यहीं नहीं ठहरता—वह चंबल, यमुना होते हुए मां गंगा तक पहुंचता है। यह हमें बताता है कि हमारा हर छोटा कार्य भी व्यापक प्रभाव रखता है। इसलिए जल संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से प्रदेश की समस्त जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार और संवर्धन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि “जल समृद्ध मध्यप्रदेश का भगीरथ संकल्प है, जल गंगा संवर्धन अभियान”। जल संरक्षण और जल संवर्धन की दिशा में मध्यप्रदेश ने जन-भागीदारी का इतिहास लिखा है। इस वर्ष प्रदेश तीसरी बार जल गंगा संवर्धन अभियान का सफल आयोजन कर रहा हैं। 19 मार्च से 30 जून तक प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान 3.0 जारी है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत प्रदेश में लगभग 2 लाख जल संरक्षण संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मंच पर विराजमान नर्मदा मिशन के संस्थापक सदी की सबसे कठोर निराहार साधना करने वाले पूज्य अवधूतदादा गुरुजी और आशीर्वाद देने पधारे समस्त संतजनों को प्रणाम कर दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।
नर्मदा मिशन के संस्थापक संत श्री दादा गुरु ने कहा कि मां गंगा के प्रकटोत्सव पर नदियों का उद्गम दिवस मनाया जाता हैं। हमें गर्व है अपनी संस्कृति पर जो हमें धर्म और प्रकृति से जोड़ती है। भारत की नदियां भारत की शक्ति है यह नदियां साक्षात मां भगवती का रूप है। मां शिप्रा , मां गंगा , मां नर्मदा, मां कावेरी , मां कृष्णा देवभूमि भारत की शक्तियां है। 22 वर्ष पहले मां शिप्रा के संरक्षण पथ पर चलने वाला नागरिक मां शिप्रा के संरक्षण और संवर्धन कर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। यह मां शिप्रा का आशीर्वाद है। प्रदेश में सुशासन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का नवीन कार्य मुख्यमंत्री डॉ यादव के नेतृत्व में हो रहा है। सिंहस्थ 2028 में जब वैश्विक समुदाय उज्जैन आयेगा तब दुनिया सनातन के सामर्थ्य को देखेगी।

*दत्त अखाड़ा घाट पर नौसेना बैंड ने दी मनमोहक प्रस्तुति*
मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा बैंड-बाजों के साथ भव्य रूप से रामघाट पहुँची, जहाँ श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माँ शिप्रा का विधिवत पूजन-अर्चन किया और 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। यह पूजन पंडित श्री गौरव उपाध्याय के द्वारा सम्पन्न हुआ। इसके पश्चात दत्त अखाड़ा घाट पर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मुंबई से आए भारतीय नौसेना के बैंड द्वारा भव्य सिम्फनी प्रस्तुति का श्रवण किया। सिम्फनी में देशभक्ति और धार्मिक धुनों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। बैंड की सामूहिक वाद्य-यंत्रों की समन्वित प्रस्तुति ने घाट पर उपस्थित श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनुभूति प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान रामघाट पूरी तरह भक्तिमय और उत्सवमय माहौल में डूबा रहा।
*मुख्यमंत्री डॉ यादव ने नौसेना बैंड से की चर्चा*
रामघाट पर मां शिप्रा के पूजन के पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीधे नौसेना बैंड के मंच पर पहुंचे, जहां उन्होंने कलाकारों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने बैंड के सदस्यों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनकी प्रस्तुति के बारे में जानकारी ली और उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर नौसेना बैंड द्वारा देशभक्ति से ओतप्रोत “जय हो” गीत की शानदार प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित जनसमूह में उत्साह और गर्व का वातावरण बना दिया।
शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा का समापन रामघाट पर भक्ति और लोक संगीत की मधुर प्रस्तुतियों के बीच सम्पन्न हुआ। समापन अवसर पर प्रसिद्ध भजन गायिका सुश्री मैथिली ठाकुर एवं उनके समूह ने अपने सुमधुर गायन से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया, जिससे पूरा घाट भक्तिरस में सराबोर हो गया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत भजनों की श्रृंखला ने राम, शिव और कृष्ण भक्ति के विविध रंगों को जीवंत कर दिया। “रामा रामा रटते रटते बीते रे उमरिया” के माध्यम से प्रभु स्मरण का संदेश दिया गया, वहीं “मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जायेंगे, राम आयेंगे” ने आस्था और विश्वास को स्वर दिया। “केवट ने कहा रघुराई से उतराई न लूंगा रे भगवान” में निष्कपट भक्ति की झलक दिखाई दी, तो “नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो” ने आदर्श जीवन मूल्यों का चित्र प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने श्री गोविंद गंधे की पुस्तक का विमोचन किया और शासन की योजनाओं पर केंद्रित गीत लॉन्च किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा,विधायक श्री जितेंद्र सिंह पंड्या, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव,जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती शिवानी कुंवर,महंत श्री रामेश्वर दास महाराज,श्री महंत हरिगिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर श्री संदीपेंद्र महाराज , श्री नरेश शर्मा,श्री राजेश कुशवाह, श्री श्रीराम तिवारी और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
