विक्रमोत्‍सव, 30 से अधिक देशों की फिल्में होंगी प्रदर्शित

उज्जैन, महाराजा विक्रमादित्‍य शोधपीठ के निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी ने बताया‍ कि कालिदास अकादमी के अभिरंग सभागार में आगामी 13 से 17 मार्च तक “इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ एंशिएंट स्प्लेंडर (प्राचीन वैभव का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव)” आयोजित किया जाएगा। यह महोत्सव प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित होगा।

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ एवं संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारत और विश्व के विभिन्न देशों की सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें हिंदी फीचर फिल्में, अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्में, वृत्तचित्र, विदेशी फीचर फिल्में तथा सबमिशन के माध्यम से चयनित फिल्मों का प्रदर्शन होगा।

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री तिवारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, पौराणिक कथाओं और विश्व सभ्यताओं से जुड़े विषयों को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में कई देशों के राजनयिक प्रतिनिधि, फिल्म निर्देशक, कलाकार और सांस्कृतिक विशेषज्ञ भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

13 मार्च 2026 की प्रमुख गतिविधियाँ हिंदी फीचर फिल्में

जय महादेव (1995), भारत मिलाप (1942), वामन अवतार (1955), राजा हरिश्चंद्र (1913), माया मच्छिंद्र (1960)

अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्में

भगवान श्री कृष्ण (गुजराती), भट्टी विक्रमर्क (तेलुगु), मीरा रो गिरधर (राजस्थानी), कृष्ण विजयम (तमिल), राधा कृष्णो (बंगाली)

डॉक्यूमेंट्री

84 महादेव (उज्जैन के गुप्त शिव मंदिर), म्यसोन (वियतनाम का शिव मंदिर परिसर), विक्रम या अयोध्या (सम्राट विक्रमादित्य का संबंध)

विदेशी फीचर फिल्में

बेडिकादा अ मी एक्स (इक्वाडोर), जे द स्कार मावर्ड हर बिगिनिंग (जर्मनी), तुर्बा (वेनेजुएला), वन वीक एंड अ डे (इजराइल), ऑपरेशन ओरियन (वेनेजुएला)

सबमिशन फिल्में

मेन भारत, डिजिटल फास्टिंग

14 मार्च 2026 की प्रमुख गतिविधियाँ

हिंदी फीचर फिल्म

महाभारत (1965), महा विष्णु (1974), हर हर महादेव (1974), राम राज्य (1943), बलराम श्रीकृष्ण (1978)

अन्य भारतीय भाषाएँ

बलराम श्री कृष्ण (गुजराती), विक्रम थुई थान कांडा (तमिल), श्री कृष्ण गरुंडी (कन्नड़), श्री कृष्ण अवतारम (तेलुगु), श्री कृष्ण परुन्धु (मलयालम)

डॉक्यूमेंट्री

द्वादश ज्योतिर्लिंग, वाट फोउ (लाओस), सांदीपनि आश्रम

विदेशी फीचर फिल्में

मिसफिट एरे ओ ते हसेस (इक्वाडोर), द हाईलैंड वैनगार्ड (इंडोनेशिया), क्यूका एंसेस्ट्रल मेमोरी (वेनेजुएला), साचा – ए बॉय फ्रॉम चेर्नोबिल (क्यूबा), द लीप ऑफ द एंजल्स (वेनेजुएला)

सबमिशन फिल्में

किताबी मस्ती, द व्हिस्पर्स ऑफ चेंज, रे इंकलाबी

15 मार्च 2026 की प्रमुख गतिविधियाँ

हिंदी फीचर फिल्में

कालिया मर्दन (1919), भक्त ध्रुव (1947), आनंद मठ (1952), कण-कण में भगवान (1963), संत तुलसीदास (1972)

अन्य भारतीय भाषाएँ

भक्त नरसैयो (गुजराती), गोपाल कृष्ण (मराठी), कृष्णा गोविंदा (ओड़िया), श्री कृष्ण लीलायु (तेलुगु), कृष्ण भक्ति (तमिल)

डॉक्यूमेंट्री

महाकाल (समय की अवधारणा), प्रम्बानन (इंडोनेशिया का त्रिमूर्ति मंदिर परिसर), हेलियोडोरस स्तंभ (150 ईसा पूर्व विष्णु स्तंभ)

विदेशी फीचर फिल्में

सिटी ऑफ पोस्ट्स (पेरू), बैट ऑर्केस्ट्रा विद ब्रोकन इंस्ट्रूमेंट्स (इजराइल), व एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनीं ऑफ द ड्रैगन (वेनेजुएला), एल मेयर (क्यूबा), जूलिया हैज अ शुगर (वेनेजुएला)

सबमिशन फिल्में

फेक आईडी, डोगले

16 मार्च 2026 की प्रमुख गतिविधियाँ

हिंदी फीचर फिल्में

गोपाल श्री कृष्ण (1938), नारद लीला (1972), कवि कालिदास (1959), नरसी भगत (1940), श्री गणेशा (1950)

अन्य भारतीय भाषाएँ

श्री कृष्ण शरणम (गुजराती), महाबीर कृष्ण (बंगाली), श्री कृष्ण रुक्मणी सत्यभामा (कन्नड़), कृष्ण गुरु व्यारप्पा (मलयालम), भगत धन्ना जट (पंजाबी)

डॉक्यूमेंट्री

महाकाल – सृष्टि का समय चक्र, मार्तंड सूर्य मंदिर (कश्मीर), अंकोरवाट (कंबोडिया का विशाल विष्णु मंदिर परिसर)

विदेशी फीचर फिल्में

वीरेन (सूरीनाम), अनिबल – ओ कॉन्क्विस्टाडोर (पुर्तगाली), द बट्राचियन्स (वेनेजुएला), व्हॉट डू यूडू?…

पूर्व फिल्म महोत्सवों में अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों की गरिमामयी उपस्थिति

महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ एवं संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा विक्रम विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित कार्यक्रमों में पिछले दो वर्षों (2024 एवं 2025) के दौरान विश्व के विभिन्न देशों से आए उच्चाधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इन आयोजनों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुदृढ़ करने वाले अनेक महत्वपूर्ण राजनयिक चेहरे शामिल हुए।

मार्च 2025 में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न देशों के उच्चायोगों और दूतावासों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। इनमें फिजी गणराज्य के उच्चायुक्त महामहिम श्री जगन्नाथ सामी एवं श्रीमती विजया कांता मणि सामी, नेपाल के राजनयिक श्री रबिंद्र जंग थापा तथा तृतीय सचिव श्री दीपक राज निरौला, नाइजीरिया के उच्चायुक्त महामहिम श्री उबोंग अकपान जॉनी एवं प्रथम सचिव श्रीमती अखुएल वुराओला सेनामी, वेनेजुएला की राजदूत महामहिम सुश्री कापाया रोड्रिगेज गोंजालेज प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त लेसोथो, दक्षिण अफ्रीका, सूरीनाम और क्यूबा के वरिष्ठ राजनयिकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

इसी प्रकार अप्रैल 2024 के सत्र में भी वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली प्रतिनिधित्व देखने को मिला। इस अवसर पर सूरीनाम के राजदूत महामहिम अरुनकोएमर हार्डियन अपने परिवार सहित उपस्थित रहे। उनके साथ वाणिज्यिक अताशे सुश्री संदियाकोएमारी मांगरे भी शामिल थीं। इसके अलावा चाड की राजदूत महामहिम श्रीमती डिला लुसिएन एवं प्रथम सचिव श्री जिमटोला कोडजिनन, लेसोथो के के राजदूत महामहिम एडवोकेट लेबोहांग वेलेंटाइन मोचाबा तथा प्रथम सचिव सुश्री बोहलोएकी तल्हाकु मोरोजेले, क्यूबा की सचिव (प्रेस एवं सांस्कृतिक मामले) सुश्री मलेना रोजस मदीना और वेनेजुएला के काउंसलर श्री अल्फ्रेडो जीसस काल्डेरा गुजमैन की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

इन आयोजनों ने वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विभिन्न देशों के साथ सहयोग और कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा प्रदान की है। विक्रम उत्सव 2026: उज्जैन में सजेगी कविताओं की महफ़िल और शिव-भक्ति का सांस्कृतिक संगम उज्जैन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्व ‘विक्रम उत्सव 2026’ के अंतर्गत आगामी दिनों में साहित्य और कला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस महोत्सव के तहत कालिदास अकादमी और टॉवर चौक पर देश के प्रख्यात कवियों और कलाकारों द्वारा विशेष प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। आगामी 14 मार्च, 2026 को रात्रि 8:30 बजे से घंटाघर चौक पर ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में देश के सुविख्यात कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। मुख्य आकर्षणः पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी (नई दिल्ली), अरुण जैमिनी (नई दिल्ली), गजेंद्र प्रियांशु (बाराबंकी), दीपक पारीक (भीलवाड़ा), प्रियंका राय (वाराणसी), रागिनी झा (पूर्णिया), पार्थ नवीन (प्रतापगढ़), उपेंद्र पांडेय (अयोध्या) और आदित्य जैन (कोटा) अपनी सहभागिता देंगे। कार्यक्रम का सूत्रधार उज्जैन के प्रसिद्ध कवि दिनेश दिग्गज द्वारा किया जाएगा।

शिव पुराण प्रदर्शनी और लोक नृत्यों की धूम

13 से 17 मार्च तक बहिरंग, कालिदास अकादमी में प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित होगी। शिव पुराण चित्रकला प्रदर्शनी विशेष होंगी। प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे से केरल म्यूरल चित्र शैली में सुजीथ कुमार द्वारा निर्मित शिव पुराण के आख्यानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसका संयोजन त्रिवेणी संग्रहालय द्वारा किया गया है। प्रतिदिन सायं 7:00 बजे से शैव परंपरा पर आधारित डेरु जंगम, शिव तांडव, ओडूगुल्लू और काठी जैसे पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी। वहीं प्रतिदिन सायं 8:00 बजे से शास्त्रीय नृत्यों की विशेष प्रस्तुतियाँ होंगी, जिसमें कुचिपुड़ी (भावना रेड्डी), भरतनाट्यम (श्रीदेवी नृत्यालय), कथक (भास्वती मिश्रा) और ओडिसी (विचित्रानंद स्वेन) के’ साथ 16 मार्च को 12 ज्योतिर्लिंगों पर आधारित मिश्रित शैलियों का प्रदर्शन किया जाएगा।

भगवान श्री जाहर वीर गोगा देव पर केंद्रित प्रस्तुति

कालिदास अकादमी के प्रांगण में आगामी 15 मार्च 2026 को लोक भक्ति और सुरों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। भगवान श्री जाहर वीर गोगा देव की महिमा पर केंद्रित ‘गोगा गायन’ की भव्य प्रस्तुति प्रातः 9:00 बजे से प्रारंभहोगी।

इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसमें केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राज्यीय कलाकार भी शामिल होंगे। कार्यक्रम में उज्‍जैन संभाग के सभी जिलों सहित इंदौर, राजस्थान और महाराष्ट्र के प्रतिक्षित लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। लोक संस्कृति का जीवत संगम भगवान गोगा देव पर आधारित यह गायन शैली सदियों से लोक मानस में रची-बसी है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न राज्यों की गायन शैलियों और वाद्य यंत्री की विविधता एक ही मंच पर दिखाई देगी। आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोक वेदेवताओं के प्रति वद्धा प्रकट करने के साथ-साथ पारंपरिक लोक कलाओं का संरक्षण करना है। आयोजन समिति ने सभी काला प्रेमियों और धर्मप्राण जनता से इन कार्यक्रमों में गरिमामय उपस्थिति की अपील की है।

भारतीय ज्योतिष में वेध परंपरा वैशिष्ट्य एवं प्रमाण’ विषय संगोष्ठी

महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी ‘भारतीय ज्योतिष में वेध परंपरा – वैशिष्ट्य एवं प्रमाण’ विषय पर 13 से 15 मार्च 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे से शोध सत्रों का संचालन होगा। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत सहित अमेरिका, नेपाल, रूस और यूक्रेन जैसे देशों के प्रख्यात विद्वान अपने विचार साझा करेंगे। भारतीय ज्योतिष शास्र में ‘वेध’ की प्राचीन परंपरा, उसकी विशिष्टताओं और वैज्ञानिक प्रमाणों पर गहन मंथना संगोष्ठी में डॉ. आनंद भारद्वाज (यूएसए), प्रो. काशीनाथ न्यौपाने व माधव प्रसाद पाण्डेय (नेपाल), ओल्गा सोकोलोवा (रूस) और गोरदाना निस (यूक्रेन) जैसे विदेशी विद्वान वर्चुअली या प्रत्यक्ष रूप से जुड़ रहे हैं। देश के दिग्गज चक्ता प्रो. देवीप्रसाद त्रिपाठी, प्रो. विनय कुमार पाण्डेय, प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी और प्रो. रामचंद्र पाण्डेय सहित देश भर के 30 से अधिक वरिष्ठ आचार्य और शोधार्थी अपनी बात रखेंगे।

यह संगोष्ठी भारतीय ज्योतिष के प्रायोगिक पक्ष और उसकी कालजयी प्रासंगिकता को वैश्विक पटल पर पुनस्र्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आयोजन समिति ने सभी कला प्रेमियों और धर्मप्राण जनता से इन कार्यक्रमों में गरिमामय उपस्थिति की अपील की है।