विक्रम उत्सव 2026, टॉवर चौक पर देर रात तक चला कवि सम्मेलन, देशभक्ति और हास्य से सराबोर रहा माहौल

उज्जैन, महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ एवं संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन के तत्वावधान में आयोजित ‘विक्रम उत्सव 2026’ के अंतर्गत शनिवार को शहर के टॉवर चौक पर भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी तथा सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के वरिष्ठ कार्यपरिषद सदस्य श्री राजेश कुशवाह ने महाराजा विक्रमादित्य के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। कवि सम्मेलन के सूत्रधार (संचालक) कवि दिनेश दिग्गज रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत वाराणसी की प्रियंका रॉय ने सरस्वती वंदना एवं गीत प्रस्तुति से की। इसके बाद प्रतापगढ़ के कवि पार्थ नवीन ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत हास्य-व्यंग्य से की। उन्होंने समसामयिक राजनीतिक परिस्थितियों को रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करते हुए पैरोडी के माध्यम से राजस्थान और मध्यप्रदेश के चुनाव परिणामों को मंच पर जीवंत किया। “राग सरकारी” के माध्यम से उन्होंने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री परिवर्तन की चर्चा पर भी हल्के-फुल्के व्यंग्य किए। अपनी प्रस्तुति में उन्होंने एक पैरोडी गीत के जरिए राजनीतिक घटनाओं ( मामा जी द्वारा गया गीत) को हास्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए गाया—
“दो हजार दे लाड़ली बहन को खर्चा चलवाओ,
मेहनत कर के 163 सीटें भी लाई आयो,
मैंने दही पिलोयो, माखन मोहन ने खाओ,
सखी री मेरो मोहन राज छुड़ाओ।”
इसके साथ ही उन्होंने समाज में व्यक्ति के दोहरे चरित्र और मानसिकता पर भी व्यंग्य किए, जिस पर श्रोताओं ने खूब ठहाके लगाए।
इसके बाद अयोध्या के कवि उपेंद्र पांडेय ने शौर्य और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत काव्य प्रस्तुति दी। अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और उज्जैन की महान परंपरा का स्मरण कराया। प्रस्तुति के दौरान उन्होंने कहा—
“बस एक प्रतिज्ञा, एक मंत्र और एक देश का नारा है— हम राष्ट्र नहीं झुकने देंगे, यह भारत वर्ष हमारा है। रोम-रोम में देशभक्ति है, कोटि-कंठ जयगान है। आदर्श महाकाल हमारे, विक्रमादित्य प्रतिमान हैं।”
कवि की इस ओजस्वी प्रस्तुति पर उपस्थित श्रोताओं ने तालियों की गूंज के साथ अपनी सराहना व्यक्त की और पूरे कार्यक्रम में देशभक्ति एवं सांस्कृतिक चेतना का वातावरण निर्मित हो गया। कवि सम्मेलन देर रात तक जारी रहा, जिसमें पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी (नई दिल्ली), अरुण जैमिनी (नई दिल्ली), गजेंद्र प्रियांशु (बाराबंकी), दीपक पारीक (भीलवाड़ा), रागिनी झा (पूर्णिया) और आदित्य जैन (कोटा) ने भी अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।