उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन की कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय परिसर में अवैध कब्जाधारियों को सख्ती के साथ हटाने का निर्णय लिया। कम्प्यूटर विज्ञान संस्थान में अवैध नियुक्ति से बने व्याख्याता को बर्खास्त करने का निर्णय लेकर अकादमिक परिसर स्थित कृषि आवासगृह परिसर स्थित (नौ-खोली एवं छः खोली) कुल 21 आवासगृह को डिस्मेंटल करने का कार्यपरिषद की पूर्व बैठक में लिए गए निर्णय के अनुक्रम में रहवासी कर्मचारियों को अवैध कब्जाधारियों से रिक्त होने वाले आवास आवंटित किये जाने का निर्णय लिया गया।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन की कार्यपरिषद की एक महत्वपूर्ण आपात बैठक गुरुवार को मुख्य प्रशासनिक भवन में संपन्न हुई। कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को बनाए रखने और संपत्तियों के संरक्षण को लेकर कड़े फैसले लिए गए।बैठक में कार्यपरिषद सदस्य श्री राजेश सिंह कुशवाह,श्री रूपचन्द पमनानी,श्री वरूण गुप्ता, डॉ. मंजूषा मिमरोट, डॉ. संजय वर्मा की उपस्थिति में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए
कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि,विश्वविद्यालय परिसर स्थित आवासो में ऐसे व्यक्ति जो विश्वविद्यालय की सेवा में नहीं है, ऐसे आवासो को रिक्त करवाये जाने कानिर्णय लिया गया है कि,विश्वविद्यालय परिसर स्थित आवासो में ऐसे व्यक्ति जो विश्वविद्यालय की सेवा में नही है। उनसे आवास रिक्त करवाए जावे।
डॉ शर्मा ने बताया कि, विश्वविद्यालय को अवैध कब्जा मुक्त करने के निर्णय के अंतर्गत यह मुहीम शुरू की जाकर इन्हें रिक्त करवाया जाकर इन अवैध कब्जाधारियों से बाजार दर से अब तक की राशि वसूली जाएगी।
डॉ शर्मा ने बताया कि,विश्वविद्यालय परिसर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए कार्यपरिषद ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है।इसके अंतर्गत जो व्यक्ति विश्वविद्यालय की सेवा में नहीं हैं और अवैध रूप से आवासों में रह रहे हैं, उन्हें तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध नियुक्ति पर प्रहार: व्याख्याता बर्खास्त
बैठक का सबसे बड़ा निर्णय कंप्यूटर विज्ञान संस्थान के व्याख्याता डॉ. रामजी यादव की बर्खास्तगी रहा। कार्यपरिषद ने माननीय उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर द्वारा याचिका क्रमांक (WP 11550/2012) को खारिज किए जाने के बाद यह कदम उठाया है।
डॉ. यादव की 14 फरवरी 1996 को हुई नियुक्ति को नियम विरुद्ध और आरक्षण प्रावधानों के विपरीत पाया गया। साथ ही, उनका जाति प्रमाण पत्र उत्तर प्रदेश का होने के कारण मध्य प्रदेश के नियमों के तहत मान्य नहीं था।
न्यायालय ने उनकी नियुक्ति को रद्द करने के विश्वविद्यालय के अधिकार को सही ठहराया, हालांकि 17 वर्षों की सेवा को देखते हुए पिछले वेतन की वसूली पर रोक लगा दी है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि,अकादमिक परिसर स्थित कृषि आवासगृह क्षेत्र की 21 ‘खोलियों'(9-खोली और 6-खोली) को डिस्मेंटल करने का कार्यपरिषद की पूर्व बैठक में लिए गए निर्णय के अनुक्रम में रहवासी कर्मचारियों को अवैध कब्जाधारियों से रिक्त होने वाले आवास आवंटित किये जाने का निर्णय लिया गया।
डॉ. शर्मा ने बताया कि,बैठक में विकास और शोध से जुड़े कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई: जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय में ‘School of Sustainability’ का नया विभाग प्रारंभ करने की अनुशंसा की गई।
डॉ शर्मा ने बताया कि,विभिन्न अध्ययनशालाओं में युक्तियुक्तकरण के तहत नए शिक्षकीय पदों की स्वीकृति दी गई।
डॉ. शर्मा ने बताया कि,मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम के साथ किए गए एमओयू (MoU) और हार्टफुलनेस संस्थान के शोध केंद्र के संचालन को सहमति प्रदान की गई।
बैठक में अन्य कार्यपरिषद सदस्यों डॉ. अलका व्यास,डॉ. रंजू गुप्ता,डॉ. राजेश टेलर, डॉ. दीपक गुप्ता,डॉ. (श्रीमती) उमा शर्मा, डॉ. शैलेन्द्र कुमार भारल और श्रीमती अर्चना मैदमवार (संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा) ने इन निर्णयों पर सर्वसम्मति प्रदान की। अंत में कुलसचिव डॉ अनिल कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया।