नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्षी दलों का कृत्य संपूर्ण नारी शक्ति का अपमान है- श्रीमती अर्चना चिटनिस

उज्जैन, नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 को लागू करने में रोड़ा अटकाकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी व डीएमके जैसे राजनीतिक दलों ने बहनों के अधिकारों पर डाका डाला है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों के मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे। महिलाएं सब कुछ भूल सकती हैं, लेकिन अपना अपमान नहीं भूल सकतीं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने का बीड़ा उठाया है। विपक्षी दलों के विश्वासघात के खिलाफ मध्यप्रदेश सहित देश भर की महिलाओं में आक्रोश है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के अधिकारों पर डाका डालने के लिए महिलाएं सबक जरूर सिखाएंगी। उक्त बात प्रदेश प्रवक्ता पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने स्थानीय होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही ।
उन्होंने कहा कि हाल ही में लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने वाले संविधान संशोधन विधेयक को लेकर जो घटनाक्रम हुआ, वह केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।
कांग्रेस, डी एम के, टी एम सी , समाजवादी पार्टी और पूरे इंडी गठबंधन के इस महिला विरोधी गठबंधन ने विधेयक को रोककर अपनी वास्तविक मानसिकता उजागर कर दी है। इन्होंने न केवल एक विधेयक को रोका, बल्कि करोड़ों महिलाओं के अधिकारों और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। विडंबना यह है कि इस पर विपक्ष जश्न मनाता रहा।
*विपक्ष का जश्न, हर महिला का अपमान है।*

महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम था, जिसे राजनीतिक स्वार्थों के कारण रोक दिया गया। यह लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को टालने का स्पष्ट उदाहरण है।

*विपक्ष की मानसिकता का इतिहास गवाह है:*
राहुल गांधी और उनके सहयोगियों ने एक बार फिर दिखा दिया कि उनके लिए महिला सशक्तिकरण केवल चुनावी नारा है, वास्तविक प्रतिबद्धता नहीं। कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के अधिकारों का विरोध करने का रहा है। उसने शाहबानो प्रकरण, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 से प्रभावित कश्मीरी महिलाओं के अधिकार का विरोध किया। हर महिला-हितैषी कदम पर कांग्रेस ने विरोध का रास्ता चुना है।

कांग्रेस ने महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों पर 98 वर्षों का अहसान जताया, लेकिन संसद में उनकी आकांक्षाओं को कुचलते हुए इठलाई, मुस्कुराई, मेज थपथपाई और जश्न मनाया। 33 प्रतिशत आरक्षण मांग रही महिलाओं को वंचित रखने पर उत्सव मनाना, हर उस महिला का अपमान है जो वर्षों से अपने अधिकार का इंतजार कर रही है।

*परिसीमन पर भ्रम फैलाने का प्रयास:*
भारत के संविधान के अनुसार, लोकसभा और विधानसभाओं का पुनर्गठन जनगणना के बाद परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है। 2001 की जनगणना के बाद श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में यह निर्णय लिया गया कि 2026 के बाद पहली जनगणना तक परिसीमन स्थगित रहेगा, ताकि दक्षिणी राज्यों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके। इसके बावजूद विपक्ष भ्रम फैला रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।

डी एम के के नेता जानबूझकर तमिलनाडु की महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी रोकने की सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है।

*भाजपा की प्रतिबद्धता – कथनी और करनी एक:*
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं को ‘शक्ति’ मानकर उन्हें सशक्त किया गया है। 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रशस्त किया, जबकि कांग्रेस ने दशकों तक केवल वादे किए। भाजपा ने तीन तलाक से मुक्ति दिलाई, शौचालय, बैंक खाते और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया।

देश की 70 करोड़ महिलाएं इस घटनाक्रम को देख रही हैं, समझ रही हैं और इसे याद रखेंगी। विपक्ष को यह आक्रोश हर चुनाव, हर स्तर और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा। यह मुद्दा अब केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, यह जन-जन का मुद्दा बनेगा।

कई बार जो विजय दिखाई देती है, वह वास्तव में अहंकार से उपजी एक बड़ी पराजय होती है। भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। देश की नारी शक्ति अब मूकदर्शक नहीं, निर्णायक शक्ति है, और वही देश का भविष्य तय करेगी।

पत्रकार वार्ता में विधायक अनिल जैन कालुहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, प्रमिला यादव, प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र भारती, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी राकेश पंड्या, विवेक गुप्ता , नगर जिला मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा विशेष रूप से मौजूद रहे।