उज्जैन, जीव और परमात्मा में कोई भेद नहीं है। जिस तरह धूल से ढके दर्पण को साफ करने पर असली चेहरा दिखाई देता है, उसी तरह ज्ञान और ध्यान से अज्ञान नष्ट होने पर हृदय में विराजमान परमात्मा की अनुभूति होती है। यह बात अटल पीठाधीश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने मंगलवार शाम इंदिरानगर स्थित हरि सिंह यादव के निवास पर आयोजित एक दिवसीय प्रवचन में कही।
मांगलिक कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रवचन में स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने कहा कि जीवन का मुख्य लक्ष्य उपासना और धार्मिक कार्य है। सृष्टि की रचना का उद्देश्य धर्म की वृद्धि करना है। धर्म पेड़ों पर फल की तरह नहीं लगता, बल्कि यह मनुष्यों द्वारा किए गए सत्कर्मों से बढ़ता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि सनातन परंपरा में विपरीत मान्यताओं के कारण धर्म में कमी आ रही है। जितने अधिक लोग श्रद्धा से सत्कर्म, तर्पण और पितरों की भक्ति करेंगे, धर्म उतना ही अधिक गुना बढ़ेगा। जहां धर्म होता है, वहीं बल होता है।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए रवि राय ने बताया कि प्रवचन के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन में समाजसेवी नारायण यादव, प्रेम सिंह यादव के साथ ही संत सत्कार समिति, युवा मंच सत्संग समिति और अंबे समिति के सदस्य व श्रद्धालु उपस्थित रहे।
