उज्जैन, भगवान श्री महाकालेश्वर की श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में भाद्रपद माह के प्रथम सोमवार को सायं 04 बजे परंपरानुसार श्री महाकालेश्वर भगवान की पंचम सवारी धूमधाम से निकली। सवारी में भगवान श्री महाकालेश्वर ने पांच विभिन्न स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए।

भगवान श्री महाकालेश्वर पालकी में श्री चंद्रमोलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, बैलगाड़ी में गरुड़ पर श्री शिवतांडव, बैलगाड़ी में नंदी पर श्री उमा-महेश तथा बैलगाड़ी रथ में श्री होल्कर के स्वरूप में विराजमान होकर अपनी प्रजा का कुशलक्षेम जानने नगर भ्रमण पर निकले।
*सभामंडप में हुआ भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन-अर्चन*
सवारी से पूर्व सभामंडप में माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार, मध्यप्रदेश शासन डॉ. गौतम टेटवाल, माननीय राज्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आनंद विभाग, मध्यप्रदेश शासन श्री लखन पटेल, माननीय राज्यमंत्री नगरीय विकास एवं आवास विभाग श्रीमती प्रतिमा बागरी तथा विधायक श्री सतीश मालवीय ने भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन-अर्चन किया।
साथ ही श्री रोशन कुमार सिंह, कलेक्टर एवं अध्यक्ष, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, एडीएम एवं प्रशासक श्री प्रथम कौशिक आदि ने भी भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन-अर्चन कर आरती में सहभागिता की। सभी गणमान्यों ने पालकी को कंधा देकर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया।
सभामंडप से भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकले। पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, सशस्त्र पुलिस बल के जवानों एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर बैंड द्वारा रजत पालकी में विराजित भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई।
राजाधिराज भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी में लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का गुणगान करते हुए शामिल हुए। विभिन्न भजन मंडलियां झांझ-मंजीरे, डमरू एवं अन्य वाद्ययंत्रों के साथ सवारी में चल रही थीं।
*मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रामघाट पर क्षिप्रा नदी के जल से भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया*
मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भगवान श्री महाकालेश्वर की पंचम सवारी के दौरान क्षिप्रा नदी के तट रामघाट पर भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर के पालकी स्वरूप में पहुंचने के बाद क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का पूजन-अर्चन किया।
भगवान श्री महाकालेश्वर की पालकी के रामघाट पहुंचने पर शंखनाद किया गया। इसके पश्चात विधिवत पूजन-अर्चन एवं आरती संपन्न हुई। पूजन एवं आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर बैंड द्वारा मधुर शिवधुनों की प्रस्तुतियां दी गईं।
रामघाट पूजन में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार डॉ. गौतम टेटवाल, माननीय राज्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, माननीय राज्यमंत्री नगरीय विकास एवं आवास विभाग श्रीमती प्रतिमा बागरी तथा राज्यसभा सांसद बालयोगी श्री उमेशनाथ महाराज सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। पूजन के पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान की पालकी को कंधा देकर सवारी में सहभागिता की।
*रामघाट पर महाकाल मंदिर बैंड की भव्य प्रस्तुति बनी मुख्य आकर्षण*
भगवान श्री महाकालेश्वर की पंचम सवारी के रामघाट पहुंचने पर श्री महाकालेश्वर मंदिर बैंड द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्वागत में विशेष संगीतमय प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर के पूजन एवं आरती के दौरान मंदिर बैंड ने मधुर एवं भव्य शिवधुनों की प्रस्तुति देकर पूरे रामघाट को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। बैंड की मनोहारी प्रस्तुति सवारी के प्रमुख आकर्षणों में रही।
*बाबा महाकाल की एक झलक के लिए असंख्य श्रद्धालु हुए आतुर*
भगवान श्री महाकालेश्वर की पंचम सवारी के दौरान सम्पूर्ण उज्जैन नगरी शिवमय हो गई। हजारों श्रद्धालुओं के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी झांझ, मंजीरे, डमरू एवं ढोल जैसे वाद्ययंत्र बजाते हुए महाकाल की आराधना करते हुए पालकी के साथ चले।
सवारी अपने परंपरागत मार्ग से होती हुई रामघाट पहुंची, जहां मां क्षिप्रा के जल से भगवान का अभिषेक एवं पूजन किया गया। पूजन-अभिषेक एवं आरती के पश्चात सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक एवं गोपाल मंदिर पहुंची। यहां सिंधिया ट्रस्ट के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन किया गया। इसके पश्चात सवारी पटनी बाजार एवं गुदरी चौराहा होते हुए पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची, जहां सवारी का विश्राम हुआ।
*रामघाट पर 1100 वैदिक बटुकों के वैदिक उदघोष से गूंज उठा क्षिप्रा तट*
श्री महाकालेश्वर भगवान की पंचम सवारी के दौरान क्षिप्रा तट पर 1100 वैदिक बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रों के उदघोष के साथ भगवान श्री महाकालेश्वर का स्वागत किया गया।
सवारी के क्षिप्रा तट पर पूजन के दौरान दत्त अखाड़ा क्षेत्र एवं रामघाट क्षेत्र में दोनों ओर 1100 बटुकों द्वारा वेद मंत्रों का उदघोष किया गया। त्रिभुवन वंदिता मां क्षिप्रा का तट वैदिक मंत्रों के उदघोष से गुंजायमान हो उठा और चारों ओर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आतुर श्रद्धालुओं के नेत्रों में श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास का सागर दिखाई दिया।
*मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप पंचम सवारी में हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा*
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप पंचम सवारी में भगवान श्री महाकालेश्वर पर हेलीकॉप्टर से लगभग 500 किलोग्राम गुलाब के पुष्पों की पंखुड़ियों से भव्य पुष्पवर्षा की गई। रामघाट पर मां क्षिप्रा के तट पर सवारी के पूजन के दौरान हुई पुष्पवर्षा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और उत्सवमय बना दिया।
*आस्था और आधुनिक विज्ञान का ऐतिहासिक एवं मनोहारी संगम*
भगवान श्री महाकालेश्वर की पंचम सवारी में आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं की सुविधा एवं भीड़ के सुगम प्रबंधन के लिए विशेष प्रबंध किए गए।
क्राउड एनालिटिक्स एवं डेटा संकलन के कार्य के लिए बाबा श्री महाकालेश्वर की सवारी में आधुनिक “महाकाल सेवक” रोबोट का उपयोग किया गया। “महाकाल सेवक” ने रामघाट पर अपनी उपस्थिति के साथ भीड़ प्रबंधन में सहायता की तथा सवारी में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत एवं वंदन किया।

*08 जनजातीय दलों के 500 कलाकारों ने बिखेरी लोक संस्कृति की छटा*
भगवान श्री महाकालेश्वर की पंचम सवारी के दौरान मध्यप्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति एवं जनजातीय परंपराओं का भव्य संगम देखने को मिला। राज्य के विभिन्न अंचलों से आए 08 जनजातीय दलों के लगभग 500 कलाकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी पारंपरिक कला एवं लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं।
मध्यप्रदेश की जनजातीय संस्कृति अपनी विशिष्ट जीवनशैली, प्रकृति प्रेम, लोकगीतों एवं ओजस्वी नृत्यों के लिए विशिष्ट पहचान रखती है। बाबा महाकाल की सवारी के अवसर पर इन पारंपरिक लोक कलाओं ने सवारी मार्ग को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया और श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

इस अवसर पर भील भगोरिया डांस दल, धार; आदिवासी लोक नृत्य भगोरिया दल, बड़वानी; राठवा आदिवासी लोक नृत्य दल, अलीराजपुर; विश्व आदिवासी भील भगोरिया नृत्य दल, झाबुआ; आदिवासी नृत्य दल, धार तथा आदिवासी लोक नृत्य दल, रतलाम सहित विभिन्न जनजातीय दलों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया।
*पंचम सवारी में हुए 84 महादेव के दिव्य दर्शन*
भगवान श्री महाकालेश्वर की पंचम सवारी में सनातन संस्कृति एवं उज्जैन की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप इस ऐतिहासिक सवारी को विशेष स्वरूप प्रदान किया गया। सवारी में पहली बार बाबा महाकाल के साथ उज्जैन के पावन चौरासी (84) महादेव की दिव्य झांकियों को सम्मिलित किया गया।

सवारी के विभिन्न चरणों एवं आयोजन में विशिष्ट थीम को आधार बनाया गया, जिसने धार्मिक अनुष्ठान को और अधिक भव्य एवं मनोहारी बना दिया। अवंतिकापुरी की इस गौरवशाली परंपरा में बाबा महाकाल जब अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले तो सम्पूर्ण मार्ग हर-हर महादेव एवं जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। पंचम सवारी की विशेषता रही कि श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में महादेव के सभी 84 स्वरूपों के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ।
*07 सितम्बर को निकलेगी भगवान श्री महाकालेश्वर की अंतिम एवं राजसी सवारी*
श्री महाकालेश्वर भगवान की भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में अंतिम एवं राजसी सवारी 07 सितम्बर 2026, सोमवार को निकलेगी। इस दौरान पालकी में श्री चंद्रमोलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद एवं डोल रथ पर श्री सप्तधान का मुखारविंद सम्मिलित रहेगा।
राजसी सवारी में परंपरागत 09 भजन मंडलियों को मिलाकर कुल 70 भजन मंडलियां सम्मिलित होंगी।
