उज्जैन, सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम युवा धर्म संसद 2026, अवन्तिका का तीन दिवसीय आयोजन शनिवार को विधिवत रूप से संपन्न हुआ। समापन समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में पूज्य आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज, आईपीपीएफ के अध्यक्ष सचिन बंसल तथा सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय सचिव माधव कुमार सहित देशभर से आए युवा, संत, शिक्षाविद, चिंतक और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।समारोप सत्र का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन से हुआ!

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश में अनेक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन जब बड़ी संख्या में युवा धर्म संसद जैसे आयोजन में बैठकर विचार-विमर्श करते दिखाई देते हैं तो यह गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि युवा धर्म संसद में पूज्य आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज द्वारा धर्म की जो व्यापक व्याख्या प्रस्तुत की गई, उससे वे अत्यंत आनंदित और धन्य अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं के प्रति आचार्य जी के विश्वास को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महर्षि विश्वामित्र को श्रीराम और लक्ष्मण पर पूर्ण विश्वास था, तभी उन्होंने महाराज दशरथ से दोनों युवाओं को अपने साथ ले जाने का आग्रह किया था। इसी प्रकार आज युवाओं की क्षमता पर विश्वास करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी सौंपने की आवश्यकता है। जिसको सेवाज्ञ संस्थानम् अच्छे से निभा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं विजय और जय-जयकार का अवसर भी मिलता है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद व्यक्ति अपने संकल्प, सामर्थ्य और पुरुषार्थ के बल पर दुनिया में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त कर सकता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से मित्रता का संदेश लेने का आह्वान करते हुए कहा कि मित्र केवल सुख में साथ देने वाला नहीं होता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर तन-मन-धन से साथ खड़ा होना ही सच्ची मित्रता है। भगवान श्रीकृष्ण मित्रता के अप्रतिम उदाहरण हैं।
मुख्यमंत्री ने युवा धर्म संसद के आयोजन को युवाओं के लिए विचार और संस्कार का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है और युवाओं में निहित ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देकर राष्ट्र के विकास में लगाया जाना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से श्रीराम के जीवन से चुनौती का सामना करने तथा श्रीकृष्ण के जीवन से मित्रता, सहयोग और कर्तव्य का भाव ग्रहण करने का आह्वान किया।
समापन समारोह में पूज्य आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत करते हुए कहा कि ‘आदरणीय मोहन जी के आने से कार्यक्रम अति मोहनीय हो गया है।’ उन्होंने कहा कि मनुष्यता को निर्धारित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण गुण कृतज्ञता है। जो कृतज्ञ है, वही वास्तविक अर्थों में मनुष्य है और जो कृतज्ञ नहीं है, उसके मनुष्य होने पर भी प्रश्न खड़ा होता है। उन्होंने युवा धर्म संसद की यात्रा में सहयोग देने वाले देशभर से आए वक्ताओं, मनीषियों, मध्य प्रदेश सरकार, वीर भारत न्यास, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय तथा सभी सहयोगी संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज जी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संबोधित करते हुए कहा कि ‘मुख्यमंत्री जी, आप श्रीकृष्ण के गुरुकुल में हैं। आप इस प्रदेश को अपनी कीर्ति के साथ-साथ समग्र विकास की ओर ले जाइए।’ उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश भारत की ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण गुरुकुल है। भगवान श्रीकृष्ण और आदिशंकराचार्य की ज्ञान-यात्रा से इस प्रदेश का गहरा संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि युवा धर्म संसद का उद्देश्य युवाओं के जीवन को संवेदनशील और विचारशील बनाने की दिशा में कार्य निरंतर करना है।
आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति की चूक और संस्था की चूक में अंतर होता है। संस्थाओं की चूक का प्रभाव व्यापक हो सकता है, इसलिए संस्थाओं और सत्ता का संचालन करने वालों के लिए जिम्मेदारी और संवेदनशीलता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सत्ता जिस व्यक्ति या वर्ग को पसंद न करे, उसकी भी उचित मांग को पूरा करने की प्रतिबद्धता लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण विशेषता है। उन्होंने युवाओं की क्षमता पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जो लोग युवाओं को केवल दोष देते हैं, उन्हें यह भी देखना चाहिए कि सेवाज्ञ संस्थानम् की पूरी योजना और स्थापना युवाओं के हाथों से आगे बढ़ी है।
समापन अवसर पर सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय सचिव माधव कुमार ने युवा धर्म संसद अवन्तिका का प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 1600 युवाओं ने सहभागिता की। प्रतिभागियों में उत्तर प्रदेश से 467, मध्य प्रदेश से 312, बिहार से 118, पश्चिम बंगाल से 104, राजस्थान से 77, गुजरात से 69, महाराष्ट्र से 65, ओडिशा से 48, केरल और झारखंड से 38-38 तथा अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों में 200 से अधिक इंजीनियरिंग विद्यार्थी, 50 से अधिक मेडिकल विद्यार्थी, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के 203 विद्यार्थी तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के 41 विद्यार्थी शामिल रहे।
माधव कुमार ने बताया कि युवा धर्म संसद के पिछले पांच आयोजनों में अब तक लगभग 7100 युवाओं की सहभागिता हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अवन्तिका में आयोजित इस छठवें संस्करण ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा, धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर संवाद का अवसर प्रदान किया।
सेवाज्ञ संस्थानम् के अध्यक्ष आशीष आशु ने देशभर से आए सभी युवाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज के मार्गदर्शन में युवा धर्म संसद को एक नई दिशा और दशा मिल रही है। उन्होंने कहा कि युवा धर्म संसद की यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्रों को युवाओं के संवाद से जोड़ने का संकल्प लिया गया है।
समापन समारोह में अगले वर्ष युवा धर्म संसद के सातवें संस्करण का आयोजन सितंबर 2027 में द्वारकापुरी में करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही सप्तपुरियों से जुड़ी युवा धर्म संसद की यात्रा को अगले वर्ष द्वारका में पूर्ण करने का संकल्प लिया गया। सेवाज्ञ संस्थानम् ने कहा कि युवा धर्म संसद की यह यात्रा युवाओं को भारतीय ज्ञान, संस्कृति, धर्म और राष्ट्र निर्माण के व्यापक विमर्श से जोड़ते हुए निरंतर आगे बढ़ेगी।
