उज्जैन,मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के सभी देव स्थानों के विकास की चिंता कर रही है। आज ही आगर के नलखेड़ा में माँ बगलामुखी देवीलोक परिसर का शिलान्यास किया गया है। उज्जैन में सिंहस्थ के करोड़ों रुपए के कार्य चल रहे हैं इनमें से आज 539 करोड़ रुपए के कार्यों की शुरुआत कर यात्रियों के लिए सुविधाओं का विकास किया जाएगा। सड़कों का विकास होगा तथा पांचजन्य, अमृत द्वार बनाए जाएंगे। सिद्धवट व अंगारेश्वर का विकास भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामायण ग्रंथ से हमें समस्त लोगों के जीवन का कल्याण करने की प्रेरणा मिलती है। जब तक रामायण का स्वर गूँजता रहेगा तब तक महर्षि वाल्मीकि का स्मरण होता रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उज्जैन के वाल्मीकि धाम में जाकर महर्षि वाल्मीकि को पुष्पांजलि अर्पित की तथा यहाँ आयोजित एक कार्यक्रम में सिंहस्थ के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे 539.18 करोड़ रुपए के कार्यों का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, राज्यसभा सदस्य बालयोगी श्री उमेशनाथ जी महाराज, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री ओम जैन, यूडीए अध्यक्ष श्री रवि सोलंकी, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव, श्री रवि वर्मा, अमित श्रीवास्तव, सदस्य श्रीमती दुर्गा बिलोटिया, श्रीमती सुशीला जाटवा, पूर्व सांसद डॉ. सत्यनारायण जटिया मौजूद थे।

इस अवसर पर स्वागत भाषण देते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री रवि सोलंकी ने कहा कि उज्जैन विकास प्राधिकरण को मुख्यमंत्री द्वारा सिंहस्थ के लिए महती भूमिका दी गई है। प्राधिकरण मंगल लोक बनाने, सांदीपनि आश्रम का विकास करने, श्री कृष्ण लोक बनाने और भगवती लोक बनाने का कार्य कर रहे है। आज के भूमि पूजन से 539 करोड़ रुपए के कामों की शुरुआत हो रही है। श्री रवि सोलंकी ने कहा कि मुख्यमंत्री अवंतिका नगरी का पूरा वैभव लौटाने की कोशिश कर रहे है।
राज्यसभा सदस्य बालयोगी श्री उमेशनाथ जी महाराज ने कहा कि वाल्मीकि धाम से आज सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा भगवान राम ने वनवास में रहकर मर्यादा का पाठ पढ़ाया, शबरी व निषाद को गले लगाया। विपक्ष के लोग अमर्यादित वक्तव्य देकर लोगों को गुमराह कर रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मर्यादित व संस्कारित रहकर प्रदेश के विकास में लगे है। कार्यक्रम के अंत में आभार श्री रवि वर्मा द्वारा प्रकट किया गया।
539.19 करोड़ के विकास कार्यों का विवरण जिनका भूमि पूजन किया गया
अंकपात चौराहे से खाकचौक चौराहा होते हुए मंगलनाथ तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य परियोजना की प्रस्तावित लागत ₹ 98.24 करोड़ है। अंकपात से मंगलनाथ तक मार्ग चौड़ीकरण न केवल सिंहस्थ 2028 की दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह उज्जैन नगर के दीर्घकालीन यातायात सुधार, पर्यटन विकास एवं शहरी विस्तार के लिए भी अत्यंत उपयोगी एवं औचित्यपूर्ण परियोजना है। प्रस्तावित मार्ग की लंबाई 2.01 K.M. है।
क्षिप्रा नदी के पूर्वी भाग पर 6.1 कि.मी. लंबाई प्रस्तावित 9 मी. चौड़ाई की रोड निर्माण कार्य
परियोजना की प्रस्तावित लागत ₹ 82.20 करोड़ है।सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए क्षिप्रा नदी के पूर्वी भाग पर 9 मीटर चौड़ाई रोड निर्माण कार्य श्रद्धालुओं को स्नान घाट तक पहुँचने में महत्वपूर्ण रोड होगा।इस रोड से घाट तक पहुँचने हेतु अप्रोच रोड का प्रावधान भी लिया गया है, जिससे भीड़ प्रबंधन में सुविधा होगी।प्रस्तावित मार्ग की लंबाई 5.33 K.M. है।
कुशाभाऊ ठाकरे मार्ग से छोटी रपट तक (शकरवासा पंचकोशी मार्ग) रोड चौड़ीकरण कार्य
परियोजना की प्रस्तावित लागत ₹ 36.75 करोड़ है। कुशाभाऊ ठाकरे मार्ग से छोटी रपट तक (शकरवासा पंचकोशी मार्ग) के सड़क चौड़ीकरण कार्य से सिंहस्थ-2028 के दौरान श्रद्धालुओं एवं आमजन के आवागमन को सुगम एवं सुरक्षित बनाया जा सकेगा। आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस, अग्निशमन एवं अन्य राहत सेवाओं की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित होने से आपदा प्रबंधन को प्रभावी बनाया जा सकेगा।यह सड़क चौड़ीकरण कार्य सिंहस्थ मेले के सुव्यवस्थित संचालन के साथ-साथ भविष्य में भी क्षेत्र की स्थायी यातायात एवं आधारभूत अधोसंरचना को सुदृढ़ करने में सहायक होगा। प्रस्तावित मार्ग की लंबाई 1.45 K.M. है।
भूखी माता मंदिर परिसर एवं संबंधित अधोसंरचना विकास कार्य
परियोजना की प्रस्तावित लागत ₹ 118.16 करोड़ है। परियोजना के अंतर्गत मंदिर परिसर, प्रवेश प्रांगण, यज्ञशाला, भोजनशाला, सेवा ब्लॉक एवं क्लॉक रूम जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग, व्यवस्थित आवागमन एवं अन्य आवश्यक जनसुविधाएँ विकसित की जाएँगी। परिसर में 38,272 वर्ग मीटर क्षेत्रफल, 12 प्रस्तावित दुकानें, 207 वाहनों की पार्किंग क्षमता तथा यज्ञशाला में 209 कुंडों का प्रावधान प्रस्तावित है। इन विकास कार्यों से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध होंगी तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना उज्जैन की धार्मिक पहचान को और सशक्त बनाने तथा सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत अधोसंरचना को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अमृत द्वार
परियोजना की प्रस्तावित लागत ₹ 19.50 करोड़ है।अमृत द्वार 120 फीट चौड़ी रोड पर 44 फीट ऊँचाई का बनाया जाना प्रस्तावित है। अमृत द्वार की मुख्य संरचना एवं मूर्तिकला में पौराणिक समुद्र मंथन की कथा को दर्शाया गया है।
पांचजन्य द्वार
उज्जैन की धार्मिक परंपरा, क्षिप्रा नदी एवं सिंहस्थ कुंभ की सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित करना।”समुद्र मंथन से निकला अमृत, उज्जैन की पावन धरती पर धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।” परियोजना की प्रस्तावित लागत ₹ 21.65 करोड़ है। पांचजन्य द्वार 120 फीट चौड़ी रोड पर 54 फीट ऊँचाई का बनाया जाना प्रस्तावित है। भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य शंख ‘पांचजन्य’ को द्वार की मुख्य थीम के रूप में दर्शाया गया है। द्वार पर भगवान श्रीकृष्ण, शेषनाग, भगवान विष्णु एवं संबंधित पौराणिक प्रसंगों को कलात्मक शिल्पकला के माध्यम से प्रदर्शित किए गए हैं। आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से द्वार को रात्रि में भी प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित करना।
सिद्धवट मंदिर परिसर एवं संबंधित अधोसंरचना विकास कार्य
परियोजना की प्रस्तावित लागत ₹ 14.58 करोड़ है। मंदिर परिसर, घाट क्षेत्र, प्रवेश एवं निकास व्यवस्था तथा पार्किंग का समन्वित विकास। भीड़ प्रबंधन हेतु अलग कतार क्षेत्र (Queue Area) एवं निकास प्रांगण (Exit Courtyard) विकसित करने का प्रस्ताव। धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप भव्य प्रवेश द्वार (नवीन द्वार) का निर्माण प्रस्तावित है। पूजन हॉल, प्रशासनिक भवन, पुजारी भवन तथा शौचालय एवं चेंजिंग सुविधाओं का विकास। प्रस्तावित पार्किंग क्षेत्र लगभग 42,400 वर्गफुट, जिसमें 120 कारों एवं 10 बसों की पार्किंग का प्रावधान है। श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं के लिए लगभग 2,050 वर्गफुट क्षेत्र में दुकानों का प्रावधान है।
