सेवा के लिए डिग्री की आवश्यकता नही होती इसका उदाहरण है सेवाधाम -बी. एल. संतोष

उज्जैन, सेवाधाम आश्रम में भारतीय शिक्षा मण्डल एवं सामाजिक कार्य विभाग सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में द्वि-दिवसीय द्वितीय इंटरनेशनल सोशल वर्कर्स कांफ्रेंस’ का देश विदेश से आए 500 से अधिक अतिथिगणों की उपस्थिति में बी. एल. संतोष, राष्ट्रीय महासचिव भारतीय जनता पार्टी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सेवाधाम आश्रम को गीव इन बेक का सबसे श्रेष्ठ उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकार में ऐसा नहीं होता है, जिनको परमानेंटली कार्ड मिल गया, परमानेंटली लाड़ली बहना मिल गई, अन्य कोई सुविधा परमानेंटली मिल गई, उसे लक्ष्य पूरा होने के बाद भी सुविधा वापस करना चाहिए, लेकिन सरकार में ऐसा नहीं होता लेकिन गर्व से कहता हूं कि अंकितग्राम सेवाधाम जैसी सामाजिक संस्थाओं में जिस दिन लाभार्थी अपने पेरों पर खड़ा होता है वह गीव इन बेक की भावना के साथ काम करता है, सेवाधाम में यही मैंने स्वयं देखा और अनुभव किया है। यहाँ जो लोग अपना दुख को दूर करने आए थे और अब सक्षम होकर सेवा में लगे है। मुझे सुधीर बाबा ने पूरा आश्रम जोश के साथ घुमाया, मैं बच्चों, महिला एवं पुरूषों से मिला और जो बच्चे कभी जिन्दगी में सुधीर बाबा को उनकी सेवा के लिए धन्यवाद भी नही दे सकते है वह उनकी आवाज सुन के मुस्कुराकर के धन्यवाद दे रहे है, हमें यही निस्वार्थ सेवा इस सनातन संस्कृति को बताना है और तभी आप सभी प्रतिभागियों का कान्फ्रेंस में आना सार्थक होगा। उन्होंने आगे कहा कि यहां रहने वाले 1200 + लाभार्थियों के आकड़ो के मायने समझाते हुए कहा कि 1200 की संख्या बहुत बड़ी बात नही है, बहुत सारे अपार्टमेंट में 1200 लोग स्वयं के साथ कुत्तो, बिल्लीयों, पालतू जानवरों को भी संभालते है, गांवों में गाय, बकरी सब संभालते है किन्तु अंकितग्राम, सेवाधाम आश्रम में 1200 में से 1100 पीड़ितों कोे कोई अन्य संभालता है, इससे इस आश्रम की गंभीरता का और सेवा का वाल्यूम समझ में आता है, यहां जो आए है वह सरकार की व्यवस्था में जिंदगी भर लावारिस है लेकिन सुधीर बाबा और उनका परिवार उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ रहे है, जिनके शरीर से कीड़े निकाले वह आज सेवा में लगे हुए है। राजनेताओं को भी सीख देते हुए कहा कि सेवाधाम जैसी संस्थाओं की मदद करना चाहिए, यदि नही कर पाए तो कोई समस्या हो तो उसमें सहयोग करना चाहिए। सुधीर भाई जो कर रहे है वह थैंकलेस सेवा है पर उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन के साथ सम्पूर्ण परिवार भी उनकी थैंकलेस सेवा में सहभागिता कर रहा है। सेवाधाम की लाईफ लाईन है बाबा सुधीर भाई, उनसे मैंने पूछा तो उन्होंने कहा कि मैंने 17 वर्ष की आयु में प्रथम कन्यादान किया था। मैं यहां आकर नतमस्तक हूं। हमारे भारत में समाजसेवा के लिए किसी डिग्री की आवश्यकता नही होती है, सेवाधाम इसका उदाहरण है सेवाधाम में आने वाला जिन्दगी भर लावारिस नही रहता, मैंने सभी से बात की, उनके अनुभव सुने एवं प्यार का स्नेह एवं स्पर्श दिया। सुधीर भाई ने डिडवानिया रतनलाल अवेदना केन्द्र, सत्यवती महिला प्रकल्प, आनन्द करूणालय, हेम वज्र विश्रांति गृह सहित नवनिर्मित चांदनी मतलानी विद्या विहार में दिव्यांग वाहिनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विशेष बच्चों ने मलखम्ब का प्रदर्शन किया।*

*इस अवसर पर कान्फ्रेंस के अध्यक्ष भरत भाई पाटनी डीडब्लूबीडीएनसी सदस्य, साामजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत शासन, सह अध्यक्ष श्री अशोक अवस्थी, बिजनेस लीडर व वरिष्ठ समाजसेवक, संस्थाध्यक्ष डाॅ.ऋषि मोहन भटनागर, आश्रम संस्थापक सुधीर भाई, प्रो. चिंतामणि मालवीय विधायक, उज्जैन उत्तर विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा एवं संजय अग्रवाल भाजपा अध्यक्ष ने मालवी पगड़ी, दुपट्टा के साथ सम्राट विक्रमादित्य राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया। इस अवसर पर अंकित शाह भू राजनीति विशेषज्ञ, डाॅ. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी मध्यक्षेत्र संयोजक भारतीय शिक्षण मण्डल, कौशल प्रताप सिंह प्रांत संयोजक भारतीय शिक्षण मण्डल, बाला कुमार थंगावेलु निदेशक सीएसआर इण्डिया हेड कोगनिजेंट, जितू भाई पटेल ‘‘गुज्जु गुरू’’, मेहुल संघवी, इन्दौर शुभम पाल सिंह केन्द्रिय भूजल बोर्ड, जलशक्ति मंत्रालय, हैदराबाद, डाॅ. देबायन सरकार इंचार्ज ग्रामीण विकास एवं प्रौद्योगिकी केन्द्र, पूर्व न्यायाधीश एमआर पाण्डे, स्वामी सदाविद्यानंद सरस्वती, दिपक सिद्धा, सुभाष जैन, डा. सचिन गोयल, परमजीत सिंह बडोला, पंकज कुमार झा, चिराग शास्त्री सहित प्रतिष्ठित समाजसेवी, शिक्षाविद्, दार्शनिक, चिंतक, शोधार्थी एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने आपने विचार साझा किए। इस अवसर पर समस्त अतिथियों का स्वागत मालवी पगड़ी, केसरिया दुपट्टे एवं महाकाल का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।*

*संस्थाध्यक्ष डाॅ. ऋषि मोहन भटनागर, दिल्ली ने समस्त अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि भारत के 15 राज्यों से अधिक प्रतिभागियों सहित आस्ट्रेलिया एवं युके से 73 स्पीकर्स, 5 कुलपति, 4 रजिस्ट्रार 22 युनिवर्सिटी के प्रतिभागियों के साथ 5 शासकीय विभागों, 10 कम्पनियों सहित 25 से अधिक एनजीओ एवं अनेक सामाजिक एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया।