उज्जैन, उज्जैन–आलोट संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने संसद भवन में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी के नेतृत्व में आवहन करते हुवे कहा कि केंद्र सरकार NEET सहित सभी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर संसद के भीतर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से संसद की गरिमा एवं लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करने का आग्रह किया।
सांसद श्री फिरोजिया ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहाँ जनहित एवं राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर तथ्यपरक, सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए। लोकतंत्र में संवाद, विचार-विमर्श और स्वस्थ बहस ही समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को संसद में चर्चा और निर्णय लेने के लिए चुना है, इसलिए सभी दलों का दायित्व है कि वे सदन की गरिमा को सर्वोपरि रखें।
श्री फिरोजिया ने कहा कि NEET जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्र सरकार विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सदन के भीतर हर प्रकार की चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने और सभी पक्षों के विचार सुनने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बावजूद विपक्ष सदन के भीतर चर्चा करने के बजाय बाहर राजनीतिक बयानबाजी कर विद्यार्थियों एवं देश की जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सीएए, अनुच्छेद 370 सहित अनेक राष्ट्रीय विषयों पर भी विपक्ष ने इसी प्रकार का रवैया अपनाया था। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का सर्वोत्तम मंच संसद है, न कि व्यवधान या नारेबाजी। यदि विपक्ष के पास कोई सुझाव या आपत्ति है तो उसे सदन के भीतर तथ्यों और तर्कों के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।
सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने कहा कि देश की जनता चाहती है कि संसद चले, जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो और राष्ट्र के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय समय पर लिए जाएँ। संसद का प्रत्येक क्षण देश के करोड़ों नागरिकों की अपेक्षाओं से जुड़ा होता है, इसलिए उसका सदुपयोग होना चाहिए।
अंत में श्री फिरोजिया ने कहा कि संसद की गरिमा, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन और सकारात्मक संवाद ही भारत के मजबूत लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए संसद की कार्यवाही में रचनात्मक सहयोग देने का आह्वान किया।