उज्जैन, सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा आयोजित युवा धर्म संसद 2026, अवन्तिका में शुक्रवार को ‘निरंकुश संवाद-पद्धति तथा सूचना एवं विचार का संघर्ष’ विषय संवाद सत्र का आयोजन किया गया। सत्र में पूज्य पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज, पूज्या माँ सद्विद्यानंद जी, श्री विष्णु प्रकाश त्रिपाठी जी, प्रो. हिमांशु राय जी तथा श्री नंदकुमार जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए सूचना, विचार, संवाद, विवेक और आत्मनियंत्रण के महत्व पर विस्तार से विचार रखा।
सत्र का संचालन नम्रता जी ने किया।
प्रो. हिमांशु राय जी ने कहा कि विचार, वाणी, विमर्श और विवेक,इन चारों का समन्वय युवाओं के लिए अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा कि पूरी तरह असहमत व्यक्ति के साथ भी संवाद संभव है, बशर्ते उसके अस्तित्व और विचार रखने के अधिकार को स्वीकार किया जाए। उन्होंने अर्जुन-श्रीकृष्ण, नचिकेता-यम तथा गार्गी-याज्ञवल्क्य के संवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रश्न सत्य तक पहुंचने की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि केवल सूचनाओं का एकत्रीकरण शिक्षित होने का प्रमाण नहीं है, बल्कि वास्तविक शिक्षा इस विवेक में है कि किस सूचना पर विश्वास किया जाए और किस पर नहीं।
श्री विष्णु प्रकाश त्रिपाठी जी ने कहा कि युवा धर्म संसद में सम्मिलित युवा राष्ट्र साधना में उपयोग आने वाले अक्षत पात्र हैं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने विवेक के प्रति दीन-हीन हो जाता है, तब वह निरंकुशता की ओर बढ़ता है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संदर्भ में कहा कि AI से डरने की आवश्यकता नहीं है, वह एक औजार है और उसके निर्माता मनुष्य ही हैं। उन्होंने युवाओं से दृढ़ इच्छाशक्ति और ‘चरैवेति’ के सिद्धांत को अपनाने तथा राष्ट्र के लिए स्वयं को समिधा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैचारिक खंडन के स्थान पर वैचारिक मंडन की संस्कृति को अपनाया जाना चाहिए।
पूज्य पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को कर्म की खेती मिली है और कौन-सी फसल लगानी है, यह धर्म बताता है तथा श्रीमद्भगवद्गीता उसका मार्गदर्शन करती है। उन्होंने कहा कि जहां प्रश्न खड़ा था, वहीं श्रीकृष्ण खड़े थे। अर्जुन के अवसाद को समाप्त करने के लिए श्रीकृष्ण ने ऐसी सूचना और विचार दिए कि उसके भीतर एक योद्धा का बीजारोपण हुआ। उन्होंने कहा कि सूचना गति मांगती है, जबकि विचार गहराई मांगता है। सूचना बाहर से आती है, लेकिन विचार भीतर से आता है। उन्होंने भारत को विचारकों की भूमि बताते हुए गोस्वामी तुलसीदास की चौपाइयों में निहित दर्शन और ज्ञान पर भी प्रकाश डाला।
पूज्या माँ सद्विद्यानंद जी ने कहा कि श्रीकृष्ण की वाणी से अर्जुन के भीतर वैचारिक मंथन आरंभ हुआ और इसी मंथन से एक शिष्य का प्राकट्य हुआ, जिसने ज्ञान को आत्मसात किया। उन्होंने युवाओं को चेताते हुए कहा कि भावनाओं को व्यक्त करने और स्वयं विचार करने के लिए समय निकालना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कर्म करने की स्वतंत्रता मिली है, इसलिए उसे अपने विवेक और निश्चय के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए। धर्म के अनुसरण से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से आत्मसम्मान बढ़ता है।
श्री नंदकुमार जी ने संवाद में आदर और आत्मनियंत्रण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संवाद केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं, बल्कि दूसरे के विचारों को समझने की प्रक्रिया भी है। संवाद से प्रज्ञा और विवेक प्राप्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का विकास केवल सरकार और कानून से नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता और आत्मनियंत्रण से भी संभव है। सत्र के दौरान युवाओं ने वक्ताओं से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका वक्ताओं ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया।
सत्र के उपरांत पूना शमा भाटे के निर्देशन में नादरूप संस्था द्वारा पद्मश्री सलूमार्दा थिम्मक्का को श्रद्धांजलि स्वरूप ‘उन्नयन’ कथक की विशेष प्रस्तुति दी गई। सांस्कृतिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भारतीय कला, पर्यावरण चेतना और सांस्कृतिक संवेदना का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
युवा धर्म संसद 2026 का अंतिम दिन 19 सितंबर को व्याख्यान सत्र, संवाद सत्र एवं भव्य समारोप के साथ संपन्न होगा। समापन समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर युवा धर्म संसद के तीन दिवसीय आयोजन के प्रमुख विचारों, युवाओं की सहभागिता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को केंद्र में रखते हुए विभिन्न वक्ताओं द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। समारोप के साथ अवन्तिका में आयोजित युवा धर्म संसद 2026 के इस विशेष आयोजन का औपचारिक समापन होगा।
