सिंहस्थ में शिप्रा जल से स्नान होगा, सिलार खेड़ी -सेवरखेड़ी प्रोजेक्ट का 84 प्रतिशत कार्य पूर्ण

उज्जैन, प्रत्येक 12 वर्षों में आयोजित होने वाले हर सिंहस्थ में साधु संतों व श्रद्धालुओं की कामना रहती थी कि वे शिप्रा के जल से ही स्नान करें। 2016 तक आयोजित हुए सभी सिंहस्थ में गर्मी के कारण पानी की कमी को देखते हुए कभी गंभीर नदी का तो कभी नर्मदा नदी का पानी शिप्रा नदी में छोड़कर स्नान करवाया जाता रहा है। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संकल्प लिया था कि 2028 के सिंहस्थ में वे साधु संतों को, श्रद्धालुओं को शिप्रा के ही पवित्र जल से स्नान करवाएंगे। यह संकल्प अब पूरा हो गया है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने 600 करोड़ की लागत से सिलारखेड़ी -सेवरखेड़ी प्रोजेक्ट बनाया और रिकार्ड समय में इसे पूरा करने जा रही है। इस प्रोजेक्ट का 84% कार्य पूर्ण हो चुका है पंपिंग स्टेशन एवम बैलेंसिंग रिजर्वायर का कार्य तेजी से हो रहा है।

*कैसे काम करेगी यह योजना*

सिलारखेड़ी -सेवरखेड़ी योजना एक नई सोच है जिसको इंजीनियरों ने जमीन पर उतारा है। जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री शुभम अग्रवाल ने बताया कि इस योजना के तहत शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी ग्राम में एक बेराज निर्माण किया गया है। इस बेराज की क्षमता 1.45 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) है। बारिश में इसके गेट लगाकर इस डेम को भरा जाएगा।इस डैम में इकट्ठे हुए पानी को 1350 किलोवाट की चार मोटर्स के द्वारा 6.5 किलोमीटर पंपिंग करके सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा।
सिलार खेड़ी तालाब का स्वरूप बड़ा कर दिया गया है।इस तालाब के आसपास की शासकीय जमीन का उपयोग करते हुए मात्र 35 हेक्टेयर जमीन जो कि निजी थी अधिग्रहित की गई। यहां पर ढाई सौ हेक्टर का बैलेंसिंग रिजर्व वायर बनाया जा रहा है। इस तालाब में 51 एमसीएम ( मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी एकत्रित होगा । इस
रिजरवायर गंभीर डेम की क्षमता 2200 एमसीएफटी से तुलना करें तो यहॉं 1800 एमटीएफटी पानी एकत्रित किया जा सकेगा। इस तालाब के आसपास चारों तरफ 6.5 किलोमीटर का मिट्टी का बंड (पाल ) बनाया गया है । पाल की ऊंचाई सतह से 20 मीटर है। बारिश में शिप्रा का पानी प्रतिदिन 1.45 एम सी एम पंप कर यहां लाया जाएगा और इसे पूरी क्षमता 51 एमसीएम तक भर लिया जाएगा।

*पानी शिप्रा नदी तक कैसे पहुंचेगा*

सिलार खेड़ी डैम में एकत्रित किया हुआ 51 एम सी एम ( 1800 एम सी एफ टी ) पानी बिना किसी तरह की पंपिंग के ग्रेविटी से फिर से 5 किलोमीटर की लंबी पाइप लाइन के जरिए कुंवारिया गांव के पास शिप्रा नदी में छोड़ दिया जाएगा। कुंवारिया ग्राम किठोदा बैराज की ठीक ऊपर है। यहां से आया हुआ पानी शनि मंदिर, गउघाट होकर रामघाट, मंगलनाथ व सिद्धनाथ तक पहुंच जाएगा। इस तरह सिलारखेड़ी रिजरवायर में एकत्रित पानी 9 महीने तक शिप्रा नदी में धीरे-धीरे करके प्रवाहित किया जा सकेगा। आने वाले सिंहस्थ और सिंहस्थ के बाद उज्जैन में शिप्रा नदी को कल कल बहते हुए , प्रवाहमान होते श्रद्धालु देख पाएंगे। एक सपने के हकीकत में बदलने की कहानी है यह।