उज्जैन, प्रेस क्लब पर आयोजित पत्रकार वार्ता में समाज सेवी नंदराम जाट ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया की कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जी द्वारा उज्जैन से निकाली गई सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस यात्रा के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया और यात्रा पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को देर से ही सही, लेकिन राम और सनातन धर्म की याद तो आई। उन्होंने इसे भगवान राम का चमत्कार बताते हुए कहा कि धार्मिक यात्राओं के साथ-साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं को भी सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों और आयोजनों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए।
समाजसेवी नंदराम जाट ने 24 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट में कहा कि देश में आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस की ओर से सत्य, सनातन और भगवान राम के नाम पर इतनी बड़ी यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि जिन नेताओं पर पहले राम मंदिर से दूरी बनाने के आरोप लगते रहे, वे अब राम मंदिर और चंदे से जुड़े मुद्दों को लेकर यात्रा निकाल रहे हैं।
नंदराम जाट ने कहा, “देर से आए, दुरुस्त आए। राम की याद तो आई। यह भगवान राम का चमत्कार है कि आज सभी राम नाम की बात कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि राम और सत्य एक-दूसरे से जुड़े हैं तथा सनातन धर्म के प्रति आस्था व्यक्त करना अच्छी बात है।
उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं से अपील की कि वे केवल यात्राओं तक सीमित न रहें, बल्कि गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, महाशिवरात्रि सहित सनातन धर्म के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि जिस तरह नेता अन्य धर्मों के आयोजनों में शामिल होते हैं, उसी तरह सनातन धर्म के त्योहारों में भी सहभागिता दिखानी चाहिए।
नंदराम जाट ने यह भी कहा कि धार्मिक यात्राएं राजनीतिक लाभ या आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि सच्ची आस्था और आध्यात्मिक भाव से निकाली जानी चाहिए। इन्हीं धार्मिक सहभागिता से ही जनता के बीच विश्वास मजबूत हो सकता है।
राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा आस्था का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान की इच्छा और व्यक्ति के कर्मों की भी इसमें अपनी भूमिका होती है।
नंदराम जाट ने अंत में भगवान राम से सभी नेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करते हुए कहा कि देश में धार्मिक सद्भाव और आस्था के साथ सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना बनी रहनी चाहिए।
