उमा सांझी महोत्सव के तृतीय दिवस सायं आरती के पश्यात सांस्कृतिक कार्यकर्मो का आयोजन किया गया

उज्जैन, उमा सांझी महोत्सव के तृतीय दिवस लोक सांस्कृतिक कार्यकर्मो का आयोजन किया गया। सायं 05 बजे ग्वालियर से पधारे श्री योगेश पुरन्दरे ढोली बुवा महाराज जी द्वारा नारदीय कीर्तन हुआ सभा मंडप में प्राचीन शिला पर किलाकोट की रंगोली बनायी गई जिसको, श्री मुकेश शर्मा, श्री भूषण व्यास, श्री संदीप शर्मा, श्री ईशान व्यास,श्री गोपाल शर्मा, श्री अक्षय शर्मा ,श्री अनंतनारायण शर्मा आदि द्वारा रंगोली का निर्माण किया गया ।
साथ में कोटितीर्थ कुंड में नौका विहार में श्री महादेव मुखौटा बैठाया गया। सभामंडप में प्रदोष पर्व पर श्री उमा महेश चौपड खेलतें हुए, गज के आसन पर श्री चंद्रमौलेश्वर जी विराजित कर झाकी सजायी गई।

इसी क्रम में तृतीय दिवस को प्रथम प्रस्तुति इन्दौर की श्रीमती शीतल अत्रे के लोक गायन समूह की हुई। प्रस्तुति का शुभारंभ सर्वप्रथम गणेश वंदना एवं गणेश भजन से किया। उसके पश्यात भगवान भोलेनाथ का भजन, गणगौर महापर्व के गीत, मां अम्बे के भजन व संत सिंगाजी के भजन गाकर वातावरण मंत्रमुग्ध किया। आपके साथ संगत कलाकार में सह गायिका सुश्री अनुषा अत्रे, हारमोनियम पर श्री हर्षद शेवगांवकर, ढोलक पर श्री विजय गंगोलिया व ऑक्टोपैड पर श्री गगन शर्मा ने संगत की।

इसी क्रम द्वितीय प्रस्तुति में मंदसौर की सुश्री गायत्री धाकड के लोक गायन समूह की हुई। प्रस्तुति का शुभारंभ जरा जरा धीरे धीरे गाड़ी हाको मारा राम गाड़ी वारा से किया। उसके पश्‍यात एक डाल दो पंछी बैठा, मेरा भोला है भंडारी, क्यूं नि आयो रे, सोना रा मुकुट में, महाकाल सरकार मेरे महाकाल सरकार, खम्मा रे खम्मा महाकाल सरकार जी ने खम्मा, तेरी जय जयकार लगाऊँगा, घोड़ो मारो छम छम करतो आवे एवं अंतिम प्रस्‍तुति में मारो हेलो सुनो नी रामा पीर से कार्यक्रम का समापन किया। आपके साथ संगत कलाकार में रील आर्टिस्ट श्री पिकेंश धाकड, प्यानो प्लेयर श्री गुरूदत्त मेहता, पैड प्लेयर श्री सुनील गंधर्व, ढोलक वादक श्री लक्ष्य दत्त मेहता, ढोल वादक श्री दीपक गंधर्व ने संगत की।

कार्यक्रम की तृतीय एवं अंतिम प्रस्तुति उज्जैन के प्रतिभा संगीत कला जिसकी निदेशिका सुश्री प्रतिभा रघुंवंशी के लोक गायन समूह की हुई। प्रस्तुति का शुभारंभ सर्वप्रथम मालवी लोक नृत्य ….. प्यारों लागे रे म्हारो मालवों देस से किया। उसके पश्यात मालवी लोक नृत्य पणिहारी …. चटके चुमड़ली ओ चंदा, राजस्थानी लोक नृत्य … खम्मा घणी, चूड़ी चमके की मनमोहक प्रस्तुतियां दी। अंतिम प्रस्तुति मालवी पारंपरिक लोक नृत्य … चुनरी रा चटके दाना चार ओ राणा की हुई। आपके साथ संगत कलाकार के रूप में सुश्री फाल्गुनी नंदवाल, सुश्री चारूल जोशी, सुश्री गार्गी आचार्य, सुश्री वैदेही पंड्या, सुश्री प्रियांशी जोशी, सुश्री सारा शर्मा, सुश्री ओजस्विनी देशपांडे, सुश्री समृद्धि गौरे तथा संगीत संयोजक पंऋ कुलदी दुबे एवं रिदम पं. गौरांश शर्मा रहे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रारंभ में दीप प्रज्जवलन मुख्य अतिथि श्री दीपक परमार आई.टी. शाखा प्रभारी श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा किया। दीपप्रज्जवलन के पश्चात श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के जनसम्पर्क प्रभारी श्री नवीन शर्मा द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों का दुपट्टा, प्रसाद व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया गया। मंच संचालन श्रीमती शैफाली चतुर्वेदी ने किया एवं आभार श्री दीपक परमार द्वारा किया गया।

दिनांक 09 अक्टूबर 2026 को उज्जैन की श्रीमती प्रियंका सेन मालव प्रेमनाट्य कला केन्द्र, उज्जैन की श्रीमती तृप्ति नागर के लोक गायन समूह एवं जयपुर की सुश्री सानिका साठे के लोक नृत्य की प्रस्तुति होगी। दोपहर 02 बजे दो वर्गों में जिसमे कनिष्ठ वर्ग कक्षा 01 से 07 एवं वरिष्ठ वर्ग में कक्षा 08 से 12 धार्मिक विषयों व संझा पर आधारित रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया जावेगा। रंगोली प्रतियोगिता के भाग लेने वाले प्रतिभागी रंगोली की सामग्री स्वयं लायेगे।